हल्द्वानी से कालाढूंगी सफर शुरू होते ही रास्ते के दोनों तरफ दूर तक फैले खेत खलियानों में गेहूं की फसल का कटाई नजर आती है।
किसान खेतों में हैं, जल्द ही थ्रेसिंग का काम शुरू होने वाला है। लेकिन फसल उठाने के साथ ही लोग चुनाव को लेकर भी सतर्क है।
कालाढूंगी में मुख्य चौराहे पर एक बड़ी सी चाय की दुकान पर चुनावी चौपाल लगी है। पार्टी विशेष से जुड़े लोगों के अलावा भी दूसरे भी चुनावी चकल्लस कर रहे हैं।
भाजपा को सपोर्ट करती आई है यह सीट
जिम कार्बेट नेशनल पार्क से सटी और पौड़ी संसदीय सीट की रामनगर विधानसभा से लगी छोटी हल्द्वानी के नाम से मशहूर कालाढूंगी सीट भाजपा को सपोर्ट करती आई है।
आम जनता में भगत सिंह कोश्यारी की छवि जमीनी नेता व कार्यकर्ताओं के बीच रहने वाले के रूप में है तो सीटिंग सांसद केसी सिंह बाबा अपनी सज्जनता के लिए जाने जाते हैं।
इस चुनावी चौपाल में राजकुमार पांडे कांग्रेस विचारधारा के है। पूरे दावे के साथ कांग्रेस की जीत का दावा करते हैं। दिगम्बर सिंह, भूपेंद्र सिंह प्रधान भी कुछ इसी तर्ज पर बतिया रहे हैं।
जैसे ही अमर उजाला टीम ने एंट्री की तो चर्चा में मशगूल बोलने से पहले थोड़ा समझने की कोशिश करते दिखते हैं।
केसी सिंह बाबा तो दस साल से क्षेत्र में आकर नहीं झांके
दिगंबर व प्रधान कहते है कि इस क्षेत्र से विधायक बंशीधर भगत ने तो यहां कोई काम नहीं करवाया। सारी विधायक निधि भाखड़ा पुल से दूसरी तरफ (हल्द्वानी से सटा ऐरिया) खर्च कर डाली।
फिर कैसे यहां से भाजपा को वोट मिलेंगे। इस वक्त यहां पर कालाढूंगी नगर पंचायत के चेयरमैन पुष्कर कत्यूरा भी मौजूद है। वह भाजपा से ताल्लुक रखते है।
बंशीधर भगत तो दो साल से यहां नहीं आए लेकिन कांग्रेस सांसद केसी सिंह बाबा तो दस साल से क्षेत्र में आकर नहीं झांके।
कत्यूरा कहते हैं कि यदि भाजपा विधायक काम नहीं करते तो इस क्षेत्र से जीत क्यों मिलती है, इस पर भी तो सोचना चाहिए।
दिगंबर कहते हैं कि बेरोजगारी बड़ी समस्या है। अब हरीश रावत मुख्यमंत्री बने हैं तो यह समस्या भी दूर होगी। लेकिन उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि दो साल से भी तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तब इस समस्या को दूर क्यों नहीं किया।
बहुगुणा तो आपदा ही झेलते रहे। मगर, नगर चेयरमैन कत्यूरा कहते हैं कि दस साल से केंद्र में कांग्रेस सरकार है तो फिर बेरोजगारी जैसी समस्या क्यों है।
सभी पार्टियों की समस्याएं और चुनौती एक जैसी
इसी चुनावी चौपाल में कुछ लोग तमाशबीन भी है, जो कि दोनों विचारधाराओं वालों की बात पर सिर हिला दे रहे हैं। लेकिन इस चुनावी चौपाल से एक बात तो जरूर निकलीं।
कांग्रेस हो या भाजपा सभी की समस्याएं और चुनौती एक जैसी है। सभी को रोजगार के अवसर चाहिए। पर्यटन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता चाहिए।
खेत खलियानों के लिए सिंचाई का पानी चाहिए। रिमोट के गांवों को जोड़ने वाली सड़कें और रोशनी के लिए बिजली चाहिए। सभी को विकास की फसल चाहिए।
कांग्रेस को देख रहे हैं दस साल से
आम जन के बीच मोदी की लहर दिखती तो है। हल्द्वानी से कालाढूंगी के रास्ते में लामाचौड कटगढ़िया गांव में उमेश बिष्ट ने कहा कि इस बार केवल मोदी। दस साल से कांग्रेस को देख रहे है, इस बार केवल मोदी सरकार।
चाकलुवा गांव में शंकर सिंह कुंवर पिथौरागढ़ के रहने वाले है, लेकिन अब हल्द्वानी में टैक्सी चालक का काम करते है। पूछते ही तपाक से बोलते है कि वोट तो भाजपा को देना है।
उन्हें अपने प्रत्याशी का नाम ठीक से याद नहीं है लेकिन पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री बची सिंह रावत की लिखी हुई चिट्ठी दिखाते है जिसमें रावत ने कुंवर को बेहद कर्मठ व मेहनती बताया है।
उसी चिट्ठी की लेमिनेशन कराकर दस साल से रखे है। कालाढूंगी बाजार में ही एमकॉम फाइनल ईयर के छात्र कहते है कि भाजपा ठीक है, स्थानीय विधायक भी बढ़िया है।
मुख्य बाजार में ही फलो की ठेली लगाने वाला मोहम्मद इकराम भी कहता है कि मोदी ठीक है। नेता बेवजह हौव्वा खड़ा कर मुसलमानों को डरा रहे है। करोड़ों लोग चुनकर भेजेंगे तो फिर कैसे मुसलमानों को खतरा हो सकता है।