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Dehradun News: आक्रामक प्रजातियों से निपटने के लिए कोशिश हुई तेज

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- पांच उप समितियां भी बनाईं गई
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने आक्रमणकारी लैंटाना जैसी प्रजातियों पर देश में एक समग्र अध्ययन और निपटने की रणनीति बनाने का काम बहु विषयी समिति को सौंपा है। उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी ने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के लिए पांच उप समिति बनाई हैं।
बहु विषयी समिति अध्यक्ष धनंजय मोहन ने बताया कि लैंटाना जैसी आक्रमणकारी प्रजातियों के भूमि पर ही नहीं बल्कि जल स्रोतों में भी आक्रमणकारी प्रजातियां हैं। उनकी पहचान, दस्तावेजीकरण करने और नुकसान से लेकर समस्या के समाधान को लेकर समिति रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति को दो साल में रिपोर्ट देना है। जनवरी में समिति का गठन हुआ था, इसके बाद समिति की पहली बैठक हो चुकी है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के लिए पांच उपसमिति का गठन भी किया गया है।
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45 दिनों में अंतिम रिपोर्ट देना होगा
इसमें आक्रामक पौधों (घास, झाड़ियां और जलीय आक्रामक प्रजातियां) पर उपसमिति पौधाें की विस्तृत सूची तैयार करेगी। आक्रामक सूक्ष्मजीव पर बनी समिति वायरस, बैक्टीरिया और फंगस की सूची तैयार करने का काम करेगी। इसी क्रम में आक्रामक कशेरूकी को लेकर भी उप समिति बनी है, इसमें आक्रामक पक्षी, मछलियों की सूची तैयार करेगी। साथ ही जोखिम मूल्यांकन और विश्लेषण और आक्रामक प्रजातियों के प्राथमिकता निर्धारण को लेकर भी उप समिति बनाई गई है। इन समिति को तय कार्य को पूरा करने के लिए 45 दिनों में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। पूर्व पीसीसीएफ धनंजय मोहन बताते जो रिपोर्ट तैयार होगी, उसमें आक्रमणकारी प्रजातियों की पहचान, कहां अब तक उन्मूलन के प्रयास, कहां-कहां पर चुनौती है। किन जगहों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाना है, उसका उल्लेख किया जाएगा।
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