उत्तराखंड के शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) में 54.11 लाख रुपए के घपले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल पर कार्रवाई तय है।
2005 से 2007 के बीच का है मामला
उनके खिलाफ आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के अनुमोदन के बाद उन्हें चार्जशीट सौंपने की तैयारी है। टिहरी जिले के नरेंद्रनगर स्थित एससीईआरटी में घपले का यह मामला वर्ष 2005 से 2007 के बीच का है।
तब ग्वाल परिषद के अपर निदेशक थे। इस दौरान कंप्यूटर, उपकरण और अन्य सामग्री की खरीद फरोख्त सवालों के घेरे में रही। वर्ष 2007-08 में इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ऑडिटर्स ऑफ इंडिया ने राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद नरेंद्रनगर का ऑडिट किया।
ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई। इस बीच वर्ष 2010-11 में ग्वाल शिक्षा निदेशक बन गए। इसी महीने 30 नवंबर को वे रिटायर हो रहे हैं। 21 सितंबर 2013 को शासन ने तत्कालीन महानिदेशक आरके सुधांशु को जांच सौंपी, जिसमें वित्तीय अनियमितता सामने आई।
महानिदेशक आरके सुधांशु ने शिक्षा निदेशक ग्वाल से विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद कई मामलों में आरोप सही पाए गए। महानिदेशक आरके सुधांशु ने इसी वर्ष 30 मार्च को जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
हाल ही में सीएम हरीश रावत ने मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद शिक्षा सचिव डॉ. एमसी जोशी ने मामले की फाइल शिक्षा मंत्री को भेजी। शिक्षा मंत्री ने भी कार्रवाई का अनुमोदन कर दिया है।
शिक्षा निदेशक के खिलाफ कार्रवाई की फाइल पर मैं अनुमोदन कर चुका हूं। जांच में कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जल्द ही निदेशक को चार्जशीट दी जाएगी। वे रिटायर होने वाले हैं, उनसे जल्द स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री
मेरे खिलाफ आरोपों की पुष्टि पूर्ण रूप से नहीं हुई है। जो भी वित्तीय कार्य हुए, उनमें प्रशासनिक स्वीकृति लेने के बाद ही काम हुआ है। 54.11 लाख के घपले की बात गलत है। बगैर टेंडर के कोई काम नहीं हुआ, पूरे प्रकरण में एक-एक बिंदु पर हमारे पास फाइल तैयार हैं।
- चंद्र सिंह ग्वाल, शिक्षा निदेशक