हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन दी गई थी नियुक्ति
दूसरा मामला नियम ताक पर रखकर सीटीईटी और यूटीईटी परीक्षा देने वाले बीएड अभ्यर्थियों का है। वर्ष 2012 से वर्ष 2018 तक बीएड अभ्यर्थी सीटीईटी प्रथम नहीं कर सकते थे, जबकि 2015 और 2017 में बीएड के आधार पर यूटीईटी नहीं की जा सकती थी, लेकिन विभाग ने इन अभ्यर्थियों का भी शिक्षक भर्ती में चयन कर लिया। मामले की शिकायत पर हालांकि विभाग ने बाद में इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए।
तीसरा मामला स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक भर्ती में शामिल करने का है। शिक्षक भर्ती सेवा नियमावली को ताक पर रखकर विभाग ने स्नातक में 50 प्रतिशत से कम अंक वालों को शिक्षक के पद के लिए नियुक्तिपत्र जारी कर दिए। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग का कहना है कि हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन इन्हें नियुक्ति दी गई थी।
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शिक्षा विभाग तो शिक्षकों की भर्ती को लेकर नियमावली से चल रहा है, लेकिन अभ्यर्थी आपस में उलझ रहे हैं, एक मामला खत्म होता है, दूसरा आ जाता है। हम 1250 पदों पर भर्ती करने जा रहे थे, पर कुछ और रुकावट आ गई। -रामकृष्ण उनियाल, शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा