उत्तराखंड सरकार ने उच्च शिक्षा परिषद का गठन कर लिया है। अब तलाश है शिक्षाविदों, सार्वजनिक क्षेत्र से बुद्घिजीवियों, शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े प्रशासक और विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों की।
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के लिए परिषद का गठन अहम शर्त थी। उत्तराखंड सरकार इस मामले में अन्य राज्यों से पिछड़ गई है।
ये बन सकते हैं सदस्य
परिषद के गठन के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नामों का चयन है। परिषद में अध्यक्ष पद पर किसी सुप्रसिद्घ शिक्षाविद या सार्वजनिक जीवन से जुड़े बुद्घिजीवी को रखा जाना है।
उपाध्यक्ष के लिए प्रोफेसर स्तर का शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़ा सुप्रसिद्घ प्रशासक (यदि अध्यक्ष गैर शैक्षणिक क्षेत्र का व्यक्ति हो अन्यथा उद्योग क्षेत्र आदि का कोई अनुभवी प्रोफेशनल) हो।
सदस्य सचिव के लिए प्रोफेसर स्तर के किसी सुप्रसिद्ध शिक्षाविद या मुख्य कार्यकारी, सदस्य के रूप में राज्य परियोजना निदेशक को शामिल किया जाना है।
दस से पन्द्रह ऐसे सदस्य भी होंगे जो कला, विज्ञान एवं तकनीकी, संस्कृति, नागरिक समाज, उद्योग एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं दक्षता विकास के क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति हो।
तीन कुलपति भी होंगे सदस्य
परिषद में राज्य विश्वविद्यालय के तीन कुलपति और स्वायत्तशासी सम्बद्घ महाविद्यालयों के दो प्राचार्य भी शामिल किए जाएंगे। एक प्रतिनिधि भारत सरकार का होगा। इनके चयन के लिए सरकारी और निदेशालय स्तर पर तलाश की जा रही है।