भूकंप की दृष्टि से उत्तराखंड जोन छह में है। पूर्व चेतावनी देने का तंत्र भी विकसित नहीं हुआ है। भूकंप आने की दशा में कहां पर अधिक प्रभाव हो सकता है, इसका आकलन वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने किया। अध्ययन के अनुसार अनुमान है कि भूकंप आया तो उसका प्रभाव गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में अलग- अलग रहेगा। इसमें तुलनात्मक तौर पर गढ़वाल मंडल अधिक संवेदनशील है।
भूकंप के प्रभावों के अध्ययन के लिए एक मॉडल होता है, जिसमें उद्भव स्थल, भूमि, सोर्स आदि के माध्यम से अनुमान लगाया जाता है। इसे सेमी- एम्पिरिकल तकनीक कहा जाता है पर वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस माॅडल में कुछ बदलाव किया। इसमें राज्य की भूमि की संरचना, पुराने छोटे भूकंप के साथ ही उत्तरकाशी में 1991 में रिक्टर स्केल पर आए 6.8 तीव्रता और नेपाल में 2011 में आए 5.4 तीव्रता के भूकंप का डेटा भी इस्तेमाल किया।
इससे नया स्ट्रांग भूकंप ग्राउंड मोशन मॉडल तैयार हुआ। क्षेत्रीय स्थितियों का डेटा इस्तेमाल कर तैयार हुए इस नए मॉडल के हिसाब से भूकंप के प्रभाव का अनुमान लगाया, तो उसमें कुमाऊं और गढ़वाल मंडल प्रभाव का अलग- अलग अनुमान सामने आया। इस अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक प्रवीण कुमार व अन्य शोधार्थियों का रिसर्च पेपर जर्नल आफ अर्थ सिस्टम साइंस में वर्ष-2023 में प्रकाशित हुआ था।