उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में धरती एक बार फिर डोल उठी। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.3 आंकी गई है। इसका केंद्र भी रूद्रप्रयाग के नजदीक है, जबकि गहराई पांच किलोमीटर के आस-पास है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के झटकों के जरिए जमीन के भीतर संचित ऊर्जा बाहर निकल रही है। धरती केभीतर इतनी स्ट्रेन एनर्जी है, जिससे कभी भी बड़ा झटका मिल सकता है।
21 भूकंप आए हैं अब तक
हिमालय के अन्य क्षेत्रों की तरह गढ़वाल-कुमाऊं के क्षेत्र में भी यह ऊर्जा एकत्र हो रही है, लेकिन इसे रिलीज होने का मौका नहीं मिल रहा।
बीती सदी में रिक्टर पैमाने पर 5.5 से अधिक की तीव्रता वाले कुल 21 भूकंप रिकार्ड किए गए हैं। यह झटके तक इस ऊर्जा के जमाव पर कोई बड़ा असर डालने में नाकाम रहे हैं।
वाडिया इंस्टीट्यूट रख रहा है नजर
बता दें कि वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान की ओर से दून में स्थापित सेंट्रल स्टेशन के साथ ही उत्तराखंड में सात, हिमाचल में दो और उत्तर प्रदेश में एक ब्राड बैंड स्टेशन लगातार धरती केभीतर की हलचल का पता देते हैं। इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट से घर्षण करती है, इस वजह से बनने वाले कोलिजन प्रेशर की वजह से झटके आते हैं।