वाडिया इंस्टीट्यूट में आयोजित व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की के भूगर्भ विभाग के प्रोफेसर डॉ. डीसी श्रीवास्तव ने कहा कि पत्थर, उनकी आंतरिक संरचना को समझेंगे, तो भूकंप आदि को समझने में मदद मिलेगी। इस वक्त दुनिया के वैज्ञानिक हिमालय की उत्पत्ति, उनकी आंतरिक संरचना समझने को लेकर अध्ययन कर रहे हैं।
प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि हिमालय का निर्माण एक साथ और एक ही तरीके से नहीं हुआ है। अगर ऋषिकेश से साकनीघार तक जाएं, तो वहां के पत्थरों की आंतरिक संरचना में काफी अंतर देखने को मिलता है। यह अंतर बताता है कि इनके निर्माण में कितना प्राकृतिक दबाव था, किस दिशा से दबाव आया।
अलग-अलग क्षेत्र में हिमालय के निर्माण की अलग-अलग कहानी है। उनकी आंतरिक संरचना, विविधता को समझने की जरूरत है। इससे प्राकृतिक आपदा की चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।