गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और बजट सत्र गैरसैंण में कराने को लेकर सरकार ने कहा कि वह सोच-विचार कर गैरसैंण का स्थायी हल निकालेगी और वह हल राज्य की जनभावना के अनुरूप होगा। इससे पहले गैरसैंण को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर बहस हुई।
पिछली सरकार के दौरान विस में संकल्प पारित होने के बावजूद गैरसैंण में बजट सत्र आहूत न करने से नाराज विपक्ष ने शुक्रवार को सदन से वाकआउट किया। इससे पूर्व विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर गैरसैंण और विधानसभा का अपमान करने का आरोप लगाया। गैरसैंण स्थायी राजधानी होगी कि नहीं और वहां सत्र होगा तो कब होगा? सरीखे सवाल उछालकर विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने नियम-58 के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा ने संकल्प लिया था अगला सत्र गैरसैंण में होगा, लेकिन सरकार ने सत्र न करके सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। इससे पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की भावना को ठेस पहुंची है। वह ठगा-सा महसूस कर रही है।
इसी दौरान पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने चिंता जताई कि चुनी हुई सरकार का विस में संकल्प सर्वसम्मति से पारित होता है, लेकिन नई सरकार उसे ठुकरा देती है। ये सदन की अवमानना है। यह सरकार गैरसैंण के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा का बहाना बना रही है, जबकि पूर्व सरकार ने एक सत्र यात्रा के दौरान ही किया।
उन्होंने विस की कार्यसंचालन नियमावली के तहत विधानमंडल भवन परिसर के लिए जरूरी अवस्थापना न जुटाये जाने के तर्क को भी यह कहकर खारिज किया कि पूर्व सरकार ने टेंटों में भी सत्र आहूत किया था, जबकि अब वहां भव्य विधानमंडल भवन व अन्य अवस्थापना का विकास हो चुका है।