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550 साल बाद फिर सक्रिय हुआ कश्मीर का भूकंपीय गैप, गंभीर हो सकते हैं परिणाम

Thu, 28 Sep 2017 01:42 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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बीते 23 सितंबर को कश्मीर संबल इलाके में आए 4.6 तीव्रता भूकंप पर तो लोगों का अधिक ध्यान नहीं गया, लेकिन इसने वैज्ञानिकों को चिंता में जरूर डाल दिया है। कम तीव्रता के इस भूकंप की घटना कई मायने में गंभीर मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह भूकंप ‘कश्मीर के भूकंपीय गैप’ में आया है, जहां पांच शताब्दी से अधिक समय से इस तरह की कोई भूगर्भीय घटना नहीं देखी गई है।
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वैज्ञानिकों की मानें तो कश्मीर भूकंपीय गैप साढ़े पांच सौ साल से अधिक समय बाद सक्रिय हुआ है। इंडियन प्लेट के तिब्बती प्लेटों के नीचे धंसने से यहां जमीन के भीतर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील जोन में आ गया है। अब इस भूकंप के सामने आने से वैज्ञानिकों को यहां आठ से अधिक तीव्रता वाले ‘ग्रेट’ श्रेणी के भूकंप की आशंका सताने लगी है।

यह माना जा रहा है कि ‘भूकंपीय गैप’ वाले क्षेत्र में ऊर्जा भर रही है। ‘भूकंपीय गैप’ वाला क्षेत्र भूकंप के लिहाज से अधिक संवेदनशील हो गया है। इंडियन प्लेट के धंसने के कारण इस पर दबाव बढ़ता जा रहा है जिससे भूगर्भीय प्लेट के फटने की आशंका पैदा हो गई है। वाडिया के भू भौतिकी समूह अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि इस ‘भूकंपीय गैप’ में इकट्ठी हुई ऊर्जा नहीं रिलीज हो सकी है जिसके ‘फूटने’ की आशंका है।
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पांच सौ साल के बाद आता है ‘ग्रेट’ श्रेणी का भूकंप

भूकंप
यह माना जाता है कि ‘ग्रेट’ श्रेणी का भूकंप पांच सौ साल के बाद आता है। यह आठ या इससे अधिक तीव्रता का हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक कश्मीर भूकंपीय गैप में साल 1555 में ग्रेट श्रेणी का भूकंप आया था। इसके बाद से यह क्षेत्र भूकंपीय गैप में शुमार किया जाने लगा। इस भूकंप के आए 562 साल गुजर गए हैं।

वर्ष 2005 में आए भूकंप से कश्मीर में मारे गए थे 86 हजार लोग
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘ग्रेट’ श्रेणी के भूकंप के अंतराल में 62 साल अधिक हो गए हैं। इसके पहले कश्मीर भूकंपीय गैप के पश्चिम में 08 अक्तूबर, वर्ष 2005 में 7.6 तीव्रता का भूकंप आ चुका है। इसका केंद्र आजाद कश्मीर में रहा था जिसमें करीब 86 हजार लोगों की मौत हुई थी और इतने ही घायल हुए थे।

इलाके में सीस्मोग्राफ सहित दूसरे उपकरण लगाने की तैयारी
संबल इलाके में आए भूकंप का केंद्र 35 किलोमीटर की गहराई में रहा है। इस क्षेत्र में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के भू-भौतिकी के समूह अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोरेडो के भूकंप विशेषज्ञ प्रोफेसर रोजर विल्हम, डॉ. एस वोंग चू अध्ययन में जुटे हैं। इस भूकंप के बाद वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान यहां सीस्मोग्राफ और दूसरे उपकरण लगाने की तैयारी कर रहा है।
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