बीते 23 सितंबर को कश्मीर संबल इलाके में आए 4.6 तीव्रता भूकंप पर तो लोगों का अधिक ध्यान नहीं गया, लेकिन इसने वैज्ञानिकों को चिंता में जरूर डाल दिया है। कम तीव्रता के इस भूकंप की घटना कई मायने में गंभीर मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह भूकंप ‘कश्मीर के भूकंपीय गैप’ में आया है, जहां पांच शताब्दी से अधिक समय से इस तरह की कोई भूगर्भीय घटना नहीं देखी गई है।
वैज्ञानिकों की मानें तो कश्मीर भूकंपीय गैप साढ़े पांच सौ साल से अधिक समय बाद सक्रिय हुआ है। इंडियन प्लेट के तिब्बती प्लेटों के नीचे धंसने से यहां जमीन के भीतर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील जोन में आ गया है। अब इस भूकंप के सामने आने से वैज्ञानिकों को यहां आठ से अधिक तीव्रता वाले ‘ग्रेट’ श्रेणी के भूकंप की आशंका सताने लगी है।
यह माना जा रहा है कि ‘भूकंपीय गैप’ वाले क्षेत्र में ऊर्जा भर रही है। ‘भूकंपीय गैप’ वाला क्षेत्र भूकंप के लिहाज से अधिक संवेदनशील हो गया है। इंडियन प्लेट के धंसने के कारण इस पर दबाव बढ़ता जा रहा है जिससे भूगर्भीय प्लेट के फटने की आशंका पैदा हो गई है। वाडिया के भू भौतिकी समूह अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि इस ‘भूकंपीय गैप’ में इकट्ठी हुई ऊर्जा नहीं रिलीज हो सकी है जिसके ‘फूटने’ की आशंका है।