फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी विभागों में ई-भुगतान व्यवस्था चौपट, धूल फांक रही हैं पीओएस मशीनें

Wed, 16 Jan 2019 10:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
money
विज्ञापन

अगर आप बिजली, पानी, गृहकर आदि का भुगतान करने जा रहे हैं तो कैश लेकर ही घर से निकलें, क्योंकि सरकार के तमाम दावों के बावजूद संबंधित विभागों में ई-भुगतान की व्यवस्था न नहीं है। नोटबंदी के बाद विभागों को दी गई प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें कहां हैं और उनका क्या प्रयोग हो रहा है, इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। 

विज्ञापन


क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में केवल कैश ही अमर उजाला में प्रकाशित खबर पढ़कर तमाम पाठकों ने फोन करके कहा कि सरकार के अन्य विभागों में भी यही हाल है। इस पर े अमर उजाला टीम ने मंगलवार को नगर निगम,, बिजली और पेयजल विभाग में ई-भुगतान व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जो स्थिति सामने आई उसका लब्बोलुआब यह है कि सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने की बात तो करती है, मगर यह व्यवस्था वह अपने विभागों में नहीं लागू करवा पाई है। जबकि, शहर की सब्जी, परचून जैसी कई छोटी दुकानों पर पीएसओ मशीनों , ई-वॉलेट जैसे डिजिटल ट्रांजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसके विपरीत अधिकतर सरकारी विभाग नोटबंदी के पहले के चल रहे पुराने ढर्रे पर ही काम कर रहे हैं। इन विभागों में अगर कोई व्यक्ति ई -भुगतान के बारे में पूछता है तो कर्मचारी केवल नगद भुगतान के लिए मजबूर करते हैं। अमर उजाला ने जो कुछ देखा, उसे आप भी अनुभव कीजिए-

नगर निगम : टैक्स दो हजार हो या दो लाख, देना होगा कैश
अगर आप नगर निगम में हाउस टैक्स जमा कराने जा रहे हैं तो कैश साथ ले लें, वरना आपको चक्कर काटने पड़ सकते हैं। नगर निगम में गृह कर जमा कराने की प्रक्रिया केवल कैश पर चल रही है। मंगलवार को यहां कई लोग टैक्स जमा कराने पहुंचे लेकिन केवल कैश भुगतान की वजह से वह परेशान नजर आए। जब हमने पड़ताल की तो पता चला कि एक निजी बैंक ने जो पीओएस मशीनें उपलब्ध कराईं थी, वह धूल फांक रही हैं। जब इस मामले पर नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह जल्द ही पीओएस से भुगतान शुरू कराएंगे।
विज्ञापन


नगर निगम में गृहकर जमा कराने आया हूं। काफी भीड़ है। स्वाइप मशीन के जरिये भुगतान के बारे में पूछा तो कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि नगद भुगतान ही होगा। इसे सुधारने की जरूरत है, अधिकारियों को ध्यान देना होगा।
- तनुज ओबेराय, पलटन बाजार

जल संस्थान : पीओएस मशीन है, लेकिन चार्ज नहीं 
जल संस्थान में ग्राहकों की सुविधा के लिए दो पीओएस मशीनें लगी हैं, लेकिन वह चार्ज नहीं होने की वजह से बंद पड़ी हैं। ऐसे में जो उपभोक्ता डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करना चाहते थे, वह नहीं कर पाए। उनका कहना था कि ऐसा पहली बार नहीं है। इसके पहले भी वह यहां आते रहे हैं। तब भी मशीन बंद थी।  

निबंधन विभाग : रोजाना 25 लाख कैश होता है इकट्ठा
निबंधन विभाग आज भी भुगतान के पुराने ढर्रे पर चल रहा है। रजिस्ट्री विभाग में एक दिन में औसतन 25 लाख रुपये का लेनदेन होता है। इसमें से अधिकतर नकद भुगतान होता है। यदि पीओएस मशीन की सुविधा हो जाए तो कर्मचारियों के साथ ही जनता को भी राहत मिल जाए। सहायक महानिरीक्षक निबंधन एपी सिंह के मुताबिक ऑनलाइन शुल्क जमा करने का विकल्प है, लेकिन लोग नकद भुगतान करते हैं। डिजिटल भुगतान को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। 

विद्युत विभाग : केवल नकद भुगतान 
केंद्र व राज्य सरकार बेशक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही हो, लेकिन यूपीसीएल बिजली बिल जमा कराने के मामले में खुद को अपडेट नहीं कर पाया है। संचार क्रांति के इस युग में अभी भी राजधानी के बिजलीघरों में बिल जमा कराने को लेकर उपभोक्ताओं को लाइनों में लगना पड़ रहा है। मंगलवार को जब ईसी रोड स्थित बिजलीघर, वसंत विहार, क्लेमेंटटाउन बिजलीघरों का जायजा लिया गया तो वहां उपभोक्ता बिल भुगतान नकद में करते नजर आए। इन उपभोक्ताओें ने कहा कि यदि बिजलीघरों में पीओएस मशीनें लगा दी जाएं तो बिल जमा कराने में सहूलियत होगी। जब यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एके सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पीओएस मशीनों से भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था पहले से है। एक साल में ऑनलाइन भुगतान में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।  

बिजली का बिल जमा करने के लिए आया हूं। आश्चर्य की बात है कि यहां ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था नहीं है। ऐसे घर जाकर धनराशि लानी पड़ी। जिसके बाद बिल जमा हो पाया।
- राहुल, महंत इंदिरेश रोड 

आज युवा ई-भुगतान अधिक करता है। सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है। लेकिन, पता नहीं क्यों विभागीय कर्मचारियों को इससे परहेज है। ई-भुगतान से व्यवस्थाएं और बेहतर होगी। लोगों का समय बचेगा। - अनुराग शर्मा, कैनाल रोड   
विज्ञापन


सभी भुगतान केंद्रों पर स्वाइप मशीनें मौजूद हैं। उपभोक्ताओं को भी जागरूक किया जा रहा है। लेकिन, ज्यादातर उपभोक्ता नगद ही भुगतान करना पसंद करते हैं।
- मनीष सेमवाल ,अधिशासी अभियंता, दक्षिण जोन 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें