नेशनल ई गवर्नेंस प्रोग्राम में उत्तराखंड सबसे फिसड्डी राज्यों में से एक है। आलम यह है कि राज्य में स्टेट डाटा सेंटर ही स्थापित नहीं हो पाया, जो प्रोग्राम का आधार है।
उत्तराखंड उन 9 राज्यों में है जिसमें यह सेंटर नहीं बना, जबकि केंद्र ने वर्ष 2011 में ही इसे बनाने का लक्ष्य दिया था। योजना शुरू होने के आठ वर्ष बाद सोमवार को निविदा आमंत्रित की गई है।
स्टेट एरिया वाइड नेटवर्क (स्वान) का नेटवर्क प्रदेश में स्थापित है, लेकिन अधिकांश विभाग अभी तक उससे नहीं जुड़े हैं। स्टेट पोर्टल एंड स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे की स्थापना अंतिम चरण में है।
वर्ष 2006 में शुरू हुआ प्रोग्राम
केंद्र ने 18 र्मई 2006 को प्रदेश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए राष्ट्रीय ई गवर्नेंस प्रोग्राम को लागू किया। इसके तहत प्रदेश को स्टेट एरिया वाइड नेटवर्क, स्टेट डाटा सेंटर, स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे, ई डिस्ट्रक्ट सहित 27 मिशन सेवाओं को शुमार किया।
वर्ष 2011 में मिशन मोड प्रोजेक्ट की संख्या बढ़ाकर 31 कर दी। मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न सरकारी महकमों की सेवाओं को ऑनलाइन बनाना था।
पायलट से आगे नहीं बढ़ी ई-डिस्ट्रिक्ट
ई गवर्नेंस का सबसे महत्वपूर्ण ई डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट 2008 में पायलट स्तर पर शुरू हुई, लेकिन उससे 27 नागरिक सेवाओं की डिलीवरी अभी तक नहीं हो पाई है। पौड़ी में शुरू हुई योजना के तहत 32 सेंटर चल रहे हैं, लेकिन उनमें चिन्हित समस्त नागरिक सेवाएं नहीं मिल रही हैं। इस योजना को 13 अन्य जनपदों पर शुरू किया जाना है।
आनलाइन हैं केंद्र के प्रोजेक्ट
केंद्र के मिशन मोड प्रोजेक्ट बैकिंग, सेंट्रल एक्साइज एडं कस्टम, इनकम टैक्स, इंश्योरेंस, पासपोर्ट, वीजा रजिस्ट्रेशन ट्रेकिंग, पेंशन, ई-आफिस, पोस्ट और यूआईडी पूरा हो चुका है।
स्टेट की बदहाल स्थिति
ट्रेजरी, कमर्शियल टैक्स, भू अभिलेख, सेवायोजन, परिवहन का कार्य तो पूरा हो चुका है, लेकिन पीडीएस, पुलिस, कृषि, ई डिस्ट्रक्ट, नगर निकाय, पंचायतें, स्वास्थ्य, शिक्षा के मिशन मोड प्रोजेक्ट नहीं बन पाए हैं।
ये सेवाएं मिलनी चाहिए सीएचसी पर
जाति प्रमाण पत्र, पर्वतीय निवास प्रमाण पत्र, स्थायी निवास, उत्तरजीवी, आय, हैसियत, स्वतंत्रता संग्राम आश्रित, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर व रोजगार कार्यालय पंजीकरण के अलावा रेलवे, हवाई टिकटों की बुकिंग, सभी प्रकार के आवेदन फॉर्म, बिलों का भुगतान के अलावा कृषि, शिक्षा एवं सेवायोजन, स्वास्थ्य, ग्रामीण बैकिंग आदि की सुविधा कामन सर्विस सेंटर पर मिलेगी। अभी तक सरकार से नागरिक को मिलने वाली कोई सेवा राज्य में सीएचसी पर ऑनलाइन शुरू नहीं हुई है।
बदहाल आईटी, केंद्र को सरेंडर की धनराशि
सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने ब्याज सहित केंद्र से स्वीकृत 41 करोड़ रुपए लौटाने पड़े हैं। आईटी विकास पर तो आईटीडीए खर्च नहीं कर पाया लेकिन खाते में पड़ी करोड़ों की रकम पर लगभग दो करोड़ ब्याज बन गया।
आखिरकार विभाग ने मूल सहित ब्याज को वापस कर दिया। राज्य सरकार से मिले फंड को भी एजेंसी ने लौटा दिया है। यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी 2007-08 में 3.8 करोड़ वापिस लौटाए थे।