आठ साल बाद बाद ही सही उत्तराखंड में ई गवर्नेंस को कागजों से जमीन पर उतारने की उम्मीद बंधने लगी है।
26 नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन किया जाना अब मुमकिन नजर आने लगा है। इसके तहत ई डिस्ट्रिक्ट परियोजना को पायलट स्तर से आगे बढ़ाकर सभी जनपदों में लागू किया जाएगा। इस बाबत सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की एपेक्स कमेटी ने कई अहम फैसले लिए हैं।
सेंटर की स्थापना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू
ई गवर्नेंस के लिए जरूरी स्टेट डाटा सेंटर की स्थापना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉमन सर्विस सेंटर और ई डिस्ट्रिक्ट सेंटर्स के जरिये आम लोगों को कई तरह के प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं दी जाएंगी।
नागरिकों को ऑनलाइन सेवाएं शुरू करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की एपेक्स कमेटी ने जो फैसले लिए हैं उनमें सबसे पहले तकनीकी जमीन मजबूत करने का फैसला किया गया है। जिससे कोई बाधा न आए।
इसके लिए स्टेट डाटा सेंटर से लेकर स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) से विभिन्न विभागों को जोड़ने के साथ राज्य मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक की कनेक्टिविटी की की क्षमता (बैंडविड्थ) बढ़ाई जा रही है।
13 सचिव बदल गए, परियोजना जस की तस
वर्ष 2006-07 से प्रदेश को केंद्र पोषित ई-गवर्नेंस के तहत कई प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए। इसके तहत आम आदमियों को 26 नागरिक सेवाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जानी थी, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में एड़ी न घिसनी पड़े।
सरकार भी इसके प्रति कितनी गंभीर रही इसी से जाना जा सकता है इस अरसे में विभाग से 13 सचिव बदल गए। मेहमान की तरह आए महकमे के मुखिया ने न तो किसी परियोजना की सुध ली, न ही कोई काम हुआ। कई बार केंद्र को ब्याज सहित पैसा तक विभाग ने सरेंडर कर अपनी किरकिरी करवाई है।
नए सिरे से तैयार किया योजना का प्रारूप
हाल में तैनात सचिव सूचना प्रौद्योगिकी दीपक गैरोला ने सोमवार को बताया कि अब शासन ने ई गवर्नेंस का प्रारूप नए सिरे से तैयार किया है। जिसपर मुख्य सचिव एन रविशंकर की अध्यक्षता में एपेक्स कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया।
लिए गए अहम फैसले
- स्टेट डाटा सेंटर की स्थापना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू
- स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क से सरकारी विभागों का सीधा जुड़ाव
- राज्य मुख्यालय से जिला मुख्यालय की बैंडविड्थ 10 एमबीपीएस
- जिला मुख्याल्य से तहसील व ब्लॉक की बैंडविडिथ 4 एमबीपीएस
- यूआईडीआई (आधार) में नामांकन एजेंसी का होगा चयन
- नागरिक सेवाओं के शुल्क का निर्धारण
- सचिवालय तथा जिला लोक एरिया नेटवर्क का उच्चीकरण
अब ऑनलाइन देखिए किसी भी जमीन की रजिस्ट्री
उत्तराखंड से बाहर किसी शहर में बैठा व्यक्ति भी अब उत्तराखंड में अपनी या किसी परिचित की रजिस्ट्री का ब्योरा देख सकेगा। स्टांप व रजिस्ट्रेशन विभाग ने नया सॉफ्टवेयर चालू कर नेशनल डाटा सेंटर पर पूरी जानकारी अपलोड कर दी है।
किसी जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित विवरण देखने के लिए कई विकल्प दिए गए हैं। जिन्हें विकल्प के तौर पर भरकर क्लिक करते ही पूरा डाटा कंप्यूटर की स्क्रीन पर होगा। यह व्यवस्था प्रदेश में लागू कर दी गई है। ऑन लाइन जानकारी के लिए e-registration./uk.gov.in पर देखी जा सकेगी।
ई-रजिस्ट्रेशन प्रणाली का विस्तार करते हुए अब विभाग ने नए सॉफ्टवेयर के साथ ही पूरा डाटा ऑन लाइन कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति केवल अपनी रजिस्ट्री ही नहीं बल्कि किसी की भी जमीन से संबंधित दस्तावेज ऑन लाइन देख सकेगा। इसके लिए कुछ विकल्प दिए गए हैं।
ऑन लाइन किसी जमीन से संबंधित रजिस्ट्री देखने के लिए खसरा संख्या, व्यक्ति का नाम, गांव का नाम, रजिस्ट्री संख्या या पार्टी (क्रेता-विक्रेता) का नाम पता होना चाहिए।
इनमें से किसी भी एक विकल्प को विभाग की वेबसाइट पर डालते ही जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। इस बेवसाइट पर नये और पुराने दोनों सर्किल रेट के हिसाब से कॉलम बनाए गए हैं।
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह शुरुआत की गई है। ऑन लाइन करने के बाद अब ऐसी भी कोई बाध्यता नहीं है कि क्षेत्र विशेष का रहने वाला कोई व्यक्ति क्षेत्र से संबंधित सब-रजिस्ट्रार के आफिस में ही रजिस्ट्री कराएगा। यह भी ओपन कर दिया गया है। जहां एक से ज्यादा सब-रजिस्ट्रार आफिस हैं वहां कोई व्यक्ति किसी भी आफिस में रजिस्ट्री बैनामा करा सकता है।
- दिलीप जावलकर, आईजी स्टांप व रजिस्ट्रेशन