लंका दहन के बाद 20 अक्तूबर को भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया जाएगा। भरत मिलाप मंचन से पहले शोभायात्रा निकाली जाएगी।
शोभायात्रा सुबह 11 बजे गोपीनाथ मंदिर से शुरू होकर कालिका मंदिर मार्ग, कनाट प्लेस, घंटाघर, राजपुर रोड, ओरियंट सिनेमा से होती हुई परेड ग्राउंड पहुंचेगी। परेड ग्राउंड में पूजा के बाद शोभायात्रा राजपुर रोड, घंटाघर, पलटन बाजार, कोतवाली, धामावाला, राजा रोड, हनुमान चौक, मोती बाजार से होती हुई कालिका मंदिर पहुंच कर समाप्त होगी।
रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनकर हुए तैयार
दशहरा कमेटी के अध्यक्ष संतोख सिंह नागपाल ने बताया कि 60 फीट रावण पुतले के अलावा इस बार 55 फीट के कुंभकरण व 50 फीट के मेघनाथ का पुतला भी बनाया गया है। इस मौके पर लंका दहन के लिए लंकानगरी का भी निर्माण किया गया है। पुतलों को हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी सैन परिवार ने तैयार किया है। लगभग एक लाख रुपये की लागत से बने पुतलों में विभिन्न रंगों की लाइटें लगाई गई हैं। पुतलों में पटाखे लगाने का काम बृहस्पतिवार से किया जाएगा।
कोटद्वार में श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में मालवीय उद्यान में चल रही रामलीला में मंगलवार रात बाली, सुग्रीव युद्ध, सीता की खोज, लंका दहन का मंचन किया गया। मंगलवार रात को रामलीला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला ने किया। रामलीला में दर्शाया गया कि बाली और सुग्रीव के बीच साम्राज्य को लेकर युद्ध होता है और इसमें भगवान श्रीराम सुग्रीव की मदद करते हैं। बाली के वध के बाद सुग्रीव हनुमान को माता सीता की खोज करने के लिए भेजते हैं।
हनुमान माता सीता की खोज करते हुए लंकापति रावण की अशोक वाटिका में पहुंचते हैं। अशोक वाटिका में माता सीता से मिलते हैं और उन्हें भगवान राम की निशानी अंगूठी दिखाते हैं। सीता से मिलने के बाद हनुमान अपनी भूख मिटाने लगते हैं। वानर को वाटिका में देखते हुए वहां पहरा दे रहे राक्षस हनुमान को रोकते हैं। इस दौरान वह अशोक वाटिका को तहस-नहस कर देते हैं।
पहरेदार इसकी सूचना लंका नरेश रावण को देते हैं। रावण के निर्देश पर मेघनाद अशोक वाटिका से हनुमान को बंदी बनाकर रावण के दरबार में पेश करते हैं। रावण सैनिकों को हनुमान की पूंछ पर आग लगाने का हुकुम देते हैं। जिसके बाद हनुमान सोने की लंका में आग लगा देते हैं। पूरी लंका धूं-धूंकर जलने लगती है। इस मौके पर विष्णु अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, हरीश बहरानी आदि मौजूद रहे। संचालन महामंत्री धर्मवीर गुसांई ने किया।