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फर्जीवाड़े से बना ड्रग इंस्पेक्टर, अब गिरी गाज

Sun, 31 May 2015 11:21 AM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में करीब छह साल पहले हुई ड्रग्स इंस्पेक्टरों की भर्ती में गड़बड़ी सामने आई है। नौकरी कर रहे सात में चार इंस्पेक्टरों के दो साल के अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
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गंभीर बात यह है कि विभाग ने भी भर्ती के समय सत्यापन कराना मुनासिब नहीं समझा। सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस ने जांच-पड़ताल के बाद इन इंस्पेक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की है। भर्ती में शामिल छह अधिकारियों की भूमिका पर विजिलेंस ने सवाल उठाते हुए विभागीय कार्रवाई के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्ष 2009 में लोक सेवा आयोग की ओर से कराई गई परीक्षा में सात ड्रग्स इंस्पेक्टरों की भर्ती हुई थी। शैक्षिक योग्यता में बी फार्मा के डिप्लोमा के साथ दो साल का अनुभव प्रमाण पत्र भी मांगा गया था।
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चयनित इंस्पेक्टरों ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर नौकरी पा ली थी। इस बीच 2012 में किसी ने भर्ती में धांधली के आरोप लगाते हुए जांच की मांग उठाई थी। शासन ने विजिलेंस को मामले की जांच के निर्देश दिए थे।

लगभग तीन साल की जांच के बाद विजिलेंस टीम ने सात में से चार ड्रग्स इंस्पेक्टरों के अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब 53 लोगों के बयान दर्ज करने के बाद विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी है।

ये पाई गई गड़बड़ी
फर्जीवाड़े में फंसे चार ड्रग इंस्पेक्टरों ने जिस दवा कंपनी से अनुभव प्रमाण पत्र दिखाया था, उस कंपनी के प्रबंध तंत्र ने इन इंस्पेक्टरों के अपने यहां ट्रेनिंग लेने से इंकार किया है। यह भी बताया कि कुछ अधिकारियों के नाजायज दबाव की वजह से यह अनुभव प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, गहनता से जांच पड़ताल के बाद विजिलेंस ने शासन को अपनी जांच रिपोर्ट भेज दी है।

स्वास्थ्य विभाग पर भी उठे सवाल
बताया जा रहा है कि विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि स्वास्थ्य महकमे ने भर्ती के समय ही अभ्यर्थियों के कागजातों का सत्यापन करने में कोताही बरती है। यदि उस समय ही सत्यापन हो जाता तो जालसाज इतने समय सरकारी नौकरी नहीं कर पाते।

...तो पहले ही बुन लिया था फर्जीवाड़े का तानाबाना
विजिलेंस टीम की जांच में ये भी सामने आया है कि ड्रग्स इंस्पेक्टर की भर्ती में बी फार्मा का डिप्लोमा ही अनिवार्य था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने दो साल के अनुभव प्रमाण पत्र को अपने स्तर से जोड़ दिया था।

लोक सेवा आयोग ने उसी विज्ञप्ति के आधार पर परीक्षा करा दी। इससे सवाल ये भी उठ रहा है कि कहीं विभागीय अफसरों ने पहले ही फर्जीवाड़े के मकसद से ही भर्ती के लिए दो साल के अनुभव प्रमाण पत्र को तो नहीं जुड़वाया था।

कुल सात इंस्पेक्टर हैं प्रदेश में
प्रदेश में इस भर्ती के सात इंस्पेक्टर हैं। स्वास्थ्य विभाग में ड्रग लाइसेंसिंग एंड कंट्रोलिंग अथॉरिटी के अधीन ड्रग इंस्पेक्टर तैनात होते हैं। सात में से एक को ड्रग कंट्रोलर बनाया गया है। इन्हीं पर पूरे विभाग की जिम्मेदारी है। इनमें से चार के अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
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