केस: 2- बौराड़ी क्षेत्र के एक युवक के पिता का चार साल पहले देहांत हो गया था। मां निजी स्कूल में अध्यापन कार्य कर परिवार का गुजर बसर कर रही है। मां पर दो बेटियों के साथ युवक की जिम्मेदारी भी है। इंटर पास करने के बाद युवक मेरठ में किसी कंपनी में दो साल तक नौकरी करता रहा।
करीब साल भर तक वह घर के लिए पैसा भी भेजता रहा और घर आना-जाना भी लगा रहता था। एक साल बाद जब युवक ने पैसे भेजने और घर आना जाना बंद किया तो परिजनों ने वही कंपनी में पहुुंचकर संपर्क किया। पता चला कि युवक नशे की गिरफ्त में है। उसने कंपनी से दो माह का एडवांस भी ले रखा है। उसके बाद परिजन उसे घर ले आए। लगभग छह माह से वह नशा मुक्ति केंद्र में है।
बच्चों को नशे से बचाने के लिए मां-बाप को उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होगी। आज बच्चे शराब, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू के अलावा अफीम, गांजा, चरस और स्मैक जैसा खतरनाक नशा भी करने लगे हैं। जब कोई बच्चा नशे का आदी हो जाता है तो उसे मुख्य धारा में वापस लाना काफी कठिन हो जाता है, क्योंकि उसकी सोचने व समझने की शक्ति कमजोर पड़ जाती है।
-मालती रावत, सोशल वर्कर, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, टिहरी
दूसरे राज्यों से स्मैक, चरस और अफीम पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी-छोटी मात्रा में पहुंच रहा है, जिस पर नजर रखना आसान नहीं है। पुलिस लगातार मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान चला रही है। एक साल के भीतर टिहरी पुलिस ने साढ़े सात किलो चरस, 29 ग्राम स्मैक और 800 ग्राम अफीम के साथ 12 लोगों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।
-डा. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी, टिहरी