केस-1
बाल रोग विभाग में पेट दर्द की शिकायत लेकर एक मरीज आया था। चिकित्सक ने एक मरीज को पेट दर्द की एंटीबायोटिक दवाई लिखी थी। तीमारदार जब फार्मेसी में दवाईयां लेने गए तो उनको एंट-डायबिटिक ड्रग दे दिया गया। जब वे चिकित्सक को दिखाने आए तो बात खुली।
केस-2
बाल रोग विभाग के चिकित्सक ने एक मरीज को आयरन-फॉलिक एसिड लिखी थी। तीमारदार जब दवाईयां लेने के लिए अस्पताल की डिस्पेंसरी में पहुंचे तो उनको मल्टी विटामिन दवाई दे दी। चिकित्सक ने जब फार्मासिस्ट से बात की तो उसने दोनों दवाईयों को एक समान होने की बात कही।
केस-3
एक मरीज को दस्त की शिकायत थी। चिकित्सक ने उसे एल्बेंडाजोल सिरप लिखा था। लेकिन फार्मासिस्ट ने उसे एल्बेंडाजोल टेबलेट दे दिया। एक दूसरे मामले में फार्मासिस्ट ने ओआरएस जिंक के साथ फार्मासिस्ट ने अपनी मर्जी से प्रो-बायोटिक दवाई दे दी थी।
पिछले कुछ दिनों में इसकी कई शिकायतें आईं हैं। इससे पहले भी फार्मेसी संवर्ग के अधिकारियों को इस तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में भी जानकारी तलब की गई है। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल