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दलाई लामा की सुरक्षा में थे इनके पूर्वज

Mon, 09 Dec 2013 08:03 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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भले ही लोग अपनी सेफ्टी के लिए घरों में डॉगी रखते हैं, लेकिन रविवार को देहरादून में आयोजित डॉग शो में यह एक जुनून बनकर सामने आया।
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दून वैली कैनेल क्लब द्वारा आयोजित इस डॉग शो में लोग अपने डॉगी के साथ पहुंचे। इस दौरान ऐसे लोग भी पहुंचे जो अपने डॉगी पर लाखों रुपए खर्च करते हैं। शो में दलाई लामा की सिक्योरिटी ब्रीड का वंशज ल्हासा एप्सो ब्रीड डॉगी आकर्षण का केंद्र रहा।

शो में कुछ लोग ऐसे भी दिखे जिनके लिए डॉगी का रखरखाव और साज-संवार का काम दीवानगी की हद तक जा पहुंचा है। ये मालिक अपने डॉगी के लिए विदेशों से मेकअप का सामान मंगाते हैं।
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दलाई लामा की सिक्योरिटी ब्रीड का वंशज आया
चंडीगढ़ से आई शुभ्रा कपूर ल्हासा एप्सो ब्रीड का डॉगी लेकर आई थीं। उनका यह डॉगी 25 से अधिक डॉग शो में बेस्ट ऑफ ब्रीड खिताब जीत चुका है। शुभ्रा की बेटी वैशाली ने बताया कि इस डॉगी के पूर्वज दलाई लामा के सिक्योरिटी ग्रुप में रह चुके हैं।

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बताया कि उसके मेकअप का पूरा ख्याल रखा जाता है। मेकअप की किट में कंघी और शैंपू भी अमेरिका और ब्राजील से आते हैं। खास बात यह रही कि इस शो में भी एप्सो ने बेस्ट ऑफ ग्रुप और बेस्ट ऑफ ब्रीड का खिताब जीता।

फिल्म में दिखा चुका है धमाल
अमेरिकन अटीका लेकर पहुंचे दून के विकास बत्रा ने बताया कि यह ब्रीड अपने खास लुक की वजह से पसंद की जाती है। उन्होंने बताया कि हॉलीवुड फिल्म अचीको में इस ब्रीड का डॉगी अपना जलवा दिखा चुका है।

वफादार की श्रेणी में सबसे ऊपर माने जाने वाले इस कुत्ते को यूटिलिटी ग्रुप में रखा जाता है। सात माह के इस कुत्ते ने शो में बेस्ट ऑफ ब्रीड का खिताब जीता।

एसी में रहता है साइबेरियन अस्की
डॉग शो में खास चर्चा में रहा साइबेरियन अस्की। इसकी खासियत यह है कि यह बेहद सर्द तापमान में ही रह सकता है। ऐसे में इसके मालिक इसे हर वक्त एसी में रखते हैं।

बेहद कम डाइट के बावजूद ज्यादा ताकत इस डॉगी की विशेषता हैं। डॉग ट्रेनर श्रीकांत श्यामल ने बताया कि यह थाइलैंड की ब्रीड है। शो में इसने बेस्ट ऑफ ब्रीड और चैंपियन सर्टिफिकेट जीता।

पिट बुल का लुक और स्टाइल जुदा
बठिंडा निवासी जैकी अपना अमेरिकन पिट बुल लेकर पहुंचे। वर्ष 2011 व 2012 में इंडियन चैंपियन रह चुके इस डॉगी की खास बात यह है कि इसके बाल और दुर्गंध इंसानों के लिए परेशानी नहीं बनते।

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फाइटर श्रेणी में तेजतर्रार मानी जाने वाली इस ब्रीड को उन्होंने थाईलैंड से मंगाया है। जैकी ने बताया कि इस ब्रीड की मांग इतनी है कि इसका एक बच्चा 50 हजार रुपए तक बिकता है।

हर डॉगी की गर्दन में ‘चावल का दाना’
कैनेल क्लब की ओर से आयोजित होने वाले शो में ऐसी कोई दिक्कत सामने नहीं आती। वजह कि यहां आने वाला हर डॉगी माइक्रोचिप से लेस होता है। कैनेल क्लब ऑफ इंडिया के नियमानुसार चावल के दाने के आकार की यह चिप डॉगी की गर्दन पर लगाई जाती है।

इस चिप में डॉगी का नाम, खास 16 अंकों का नंबर और मालिक का पता दर्ज होता है। मशीन के सामने डॉगी के आते ही स्क्रीन पर उसकी पूरी डिटेल सामने आ जाती है। किसी शो में प्रतिभाग के लिए डॉगी का कैनेल क्लब आफ इंडिया से जारी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होता है।
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यह चिप इंजेक्शन के जरिये डॉगी की गर्दन में लगाई जाती है। चूंकि, गर्दन के हिस्सा काफी मांसल होता है, इससे डॉगी को कोई परेशानी नहीं होती। चिप ताउम्र चलती है।
-पंकज कनौजिया, माइक्रोचिप एक्सपर्ट
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