स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के पीजी डॉक्टरों का आंदोलन शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान डॉक्टर मुख्य गेट पर धरना देकर बैठ गए और गेट पर ताला भी लगा दिया। हालांकि कुछ देर बाद ताला खोल दिया गया। इस दौरान ओपीडी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। पीजी डॉक्टरों ने ओपीडी से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकालकर सरकार के खिलाफ रोष जताया और अपनी मांग जल्द पूरी करने की मांग की। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला तो सोमवार को सचिवालय कूच किया जाएगा।
आंदोलनकारी डॉक्टर ओपीडी के बाहर धरने पर बैठे रहे। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना भी डॉक्टरों के बीच पहुंचे और शासन स्तर से जल्द सकारात्मक निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया। हालांकि, पीजी डॉक्टर लिखित आदेश की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
रैली के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं बाधित करने का प्रयास भी किया। वे अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए और कुछ समय के लिए गेट पर ताला लगा दिया। हालांकि बाद में ओपीडी सेवाएं दोबारा शुरू हो गईं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग लंबे समय से लंबित है और सरकार को इस पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
प्रदेश के करीब 600 पीजी डॉक्टर आंदोलन में शामिल
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 पीजी डॉक्टर आंदोलन में शामिल हैं। वर्तमान में उन्हें करीब 69 से 71 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है। डॉक्टर इसे बढ़ाकर करीब 1.25 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदारियों और कार्यभार को देखते हुए स्टाइपेंड में उचित वृद्धि जरूरी है।
काम पर लौटे इंटर्न, मिली राहत
वहीं, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सात सितंबर से आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने कैबिनेट के स्टाइपेंड 17 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने के निर्णय के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया। शुक्रवार को निर्णय के बाद शनिवार को इंटर्न डॉक्टर काम पर लौट आए। इससे अस्पताल के वार्ड और अन्य सेवाओं में पिछले कई दिनों से बनी अव्यवस्था से मरीजों और तीमारदारों को राहत मिली।