सरकारी अस्पताल में ओपीडी में रोगियों को देखने का समयसुबह आठ बजे से दो बजे तक है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के चलते कुछ चिकित्सक निर्धारित समय से आधा घंटा पहले ही कक्ष छोड़ देते हैं, जिससे मरीजों और तीमारदारों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।
करोड़ों की लागत से बने सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं लचर बनी हैं। अस्पताल में प्रतिदिन छह सौ से अधिक रोगी उपचार के लिए आते हैं, लेकिन डेढ़ बजे के बाद चिकित्सक मिलेंगे, इसकी गारंटी नहीं है।
ओपीडी में चिकित्सकों की ड्यूटी सुबह आठ बजे से दो बजे तक रहती है, लेकिन कुछ डॉक्टरों के आधा घंटे पहले ही कक्ष छोड़ देने से मरीजों को दिक्कत होती है।
ऐसी स्थिति में रोगी कक्ष के बाहर चिकित्सक का इंतजार करते हैं। दो बजे तक चिकित्सक के कक्ष में नहीं आने पर बिना चिकित्सीय परामर्श के घर लौटना पड़ता है। कई रोगी प्राइवेट अस्पताल का रुख करते हैं।
बुखार होने पर करीब एक बजे अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सक कक्ष से नदारद मिले। कक्ष में एक युवक और एक युवती बैठे थे, उनसे चिकित्सक के बारे में पूछा तो जवाब मिला आ भी सकते हैं और नहीं भी।
- मलकीत सिंह, स्थानीय निवासी
दांत के दर्द से पीड़ित परिचित को दिखाने करीब सवा एक बजे अस्पताल आए थे। चिकित्सक कक्ष में नहीं थे। काफी इंतजार के बाद चिकित्सक नहीं आए। इस बीच दो बज गए। एक कर्मचारी आया और कक्ष में ताला लगाकर चलता बना।
-जयवीर शर्मा, स्थानीय निवासी
अधिकारी की सुनिए
कई बार चिकित्सक वार्ड में भर्ती गंभीर रोगी को देखने चले जाते हैं, जिससे इस तरह की समस्या आ जाती है। फिर भी कोई चिकित्सक बिना बताए कक्ष से नदारद रहता है तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डा.एके गैरोला, चिकित्साधीक्षक