उत्तराखंड आपदा से निपटने में शासन-प्रशासन पर भले ही कोताही की तमाम तोहमतें लग रही हों, लेकिन प्रशासन की संजीदगी की भी कुछ मिसालें हैं।
रामबाड़ा के पास एक खच्चर के पैर में लोटा फंस गया था। जिसकी वजह से वह बेहद तकलीफ में था। इसे देखकर राहत आयुक्त बीवीआरसी पुरुषोत्तम लोटा निकालने के लिए आठ सदस्यीय विशेष टीम गठित कर दी।
आपदा के दौरान इंसानों के साथ जानवर भी अपनी जान के लिए भागे थे। पीड़ित खच्चर भी शायद अपनी जान बचाने के लिए ही भाग रहा था कि रास्ते में उसका पैर लोटे में फंस गया। खच्चर के भागते रहने से लोटे की तली टूट गई। इस वजह से उसके खुर बाहर निकल गए, लेकिन टूटा लोटा फंसा होने से पैर में जख्म हो गए।
खच्चर किसी तरह खड़ा तो हो जाता था, लेकिन चलने में दुश्वारी होती थी। जख्म पक गए थे। राहत आयुक्त पुरुषोत्तम रामबाड़ा और आसपास के क्षेत्र के निरीक्षण पर थे तो भीमबली में उनकी निगाह इस खच्चर पर पड़ी।
खच्चर की तकलीफ देखने के बाद उन्होंने उसके पैर से लोटा निकालने के लिए संयुक्त निदेशक डा. अविनाश आनंद की अगुवाई में विशेष टीम गठित कर दी। इस टीम में दो पशुधन प्रसार अधिकारी ओमप्रकाश टम्टा और राजेश सिंह नेगी भी शामिल थे।
15 अगस्त को विशेष टीम राजधानी से भीमबली पहुंची। भीमताल लाकर विशेष कटर से खच्चर के पैर से लोटा काटकर निकाला गया। इस खच्चर के साथ ग्यारह और खच्चरों को भीमबली से निकाल कर जाखधार स्थित अस्थायी पशु आश्रय लाया गया।
खच्चर के पैर की मरहम-पट्टी होती रही। अविनाश ने बताया कि दो-तीन के बाद खच्चर का मालिक आ गया। क्षेत्रीय लोगों और वहां तैनात डाक्टरों से उसकी पहचान कराकर खच्चर को घर भेज दिया गया।
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