त्यूनी क्षेत्र में एक ऐसा वाक्या सामने आया जिसने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी।
उपचार के लिए देर रात स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचने के बाद कई घंटे तक गर्भवती महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। स्वास्थ्य कर्मी, डॉक्टरों और 108 सेवा किसी ने भी उस महिला की मदद नहीं की।
रात पौने एक बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गए
रडू़ निवासी सुनीता देवी पत्नी कल्याण सिंह ने शुक्रवार की देर रात घर पर ही एक शिशु को जन्म दिया। इस बीच प्रसव के बाद उसके पेट में नाल फंस गई। आनन-फानन में रात पौने एक बजे परिजन उसे लेकर 13 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी पहुंचे।
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इस दौरान अस्पताल में कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। करीब दो घंटे तक परिजन अस्पताल परिसर में बने प्रभारी चिकित्साधिकारी के घर का दरवाजा पीटते रहे, लेकिन किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला।
महिला दर्द से तड़पती रही
परिजनों ने 108 कर्मियों से मदद मांगी तो उन्होंने भी खराब रास्तों का बहाना बनाकर मरीज को विकासनगर या दून अस्पताल ले जाने से मना कर दिया। इस बीच महिला दर्द से तड़पती रही।
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थक हारकर सुबह चार बजे किसी तरह परिजन प्राइवेट वाहन में महिला को दून अस्पताल ले गए, जहां उपचार के बाद उसकी हालत ठीक बताई जा रही है।
प्रभारी चिकित्साधिकारी आरके दीक्षित से वार्ता करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। सीएमओ गुरपाल सिंह ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। प्रभारी चिकित्साधिकारी से जवाब तलब किया जाएगा।
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