प्रदेश में ऐसे 11.70 लाख
उत्तराखंड में भी युवाओं में नशे की प्रवृत्ति एक प्रमुख समस्या के रूप में उभर कर सामने आ रही है। जिसका उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2001 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों का औसत कुल आबादी को 10 प्रतिशत है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में मानसिक रोगियों की संख्या 11.70 लाख होने का अनुमान है।
गढ़वाल, कुमाऊं में 100 बेड के नशा मुक्ति केंद्र बनाने की योजना
नशे के आदी हो चुके लोगों के लिए इलाज के लिए प्रदेश सरकार की गढ़वाल और कुमाऊं में 100 बेड के नशा मुक्ति केंद्र बनाने की योजना है। अभी तक सेलाकुई में प्रदेश का एक मात्र मानसिक रोग अस्पताल है।
नशा छुड़वाने को टेली काउंसिलिंग की सुविधा
प्रदेश सरकार नशा मुक्ति के लिए बेहतर सेवाएं और इलाज की व्यवस्था कर रही है। नशा छुड़वाने के लिए टेली काउंसिलिंग की सुविधा भी दी जा रही है। टेली मानस के तहत 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता मुहैया कराई जा रही है। इसके लिए टोल फ्री नंबर-14416 एवं 18008914416 है।
नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माना
मानसिक स्वास्थ्य नियमावली का उल्लंघन करने पर दो लाख की जेल और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। पहली बार में उल्लंघन करने पर पांच से 50 हजार रुपये, दूसरी बार में दो लाख और बार-बार उल्लंघन पर पांच लाख जुर्माने किया जाएगा।
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उत्तराखंड नशा मुक्त राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मानसिक स्वास्थ्य नियमावली के तहत बिना पंजीकरण चलने वाले नशा मुक्ति केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग को प्रदेश भर से अब तक 110 केंद्रों से पंजीकरण के लिए आवेदन मिले हैं। जल्द ही इन केंद्रों का निरीक्षण जाएगा। -डाॅ. आर राजेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य