दून अस्पताल के डॉक्टर समय से पहले ही ओपीडी छोड़कर चले जाते हैं। परचा बनवाकर जब रोगी आते हैं तो चैंबर खाली मिलता है।
रोगी इधर-उधर भटका करते हैं। दून ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के निदेशक डा. एलके गुसाईं के निर्देशों पर डॉक्टरों ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
दून अस्पताल में रोगी परचा बनाने के लिए तीन काउंटर हैं, लेकिन एक काउंटर हमेशा बंद रहता है। सुबह 10 बजे के बाद रोगियों की भीड़ लगना शुरु होती है। एक परचा बनने में पांच से दस मिनट लगता है।
रोगी को परचा बनवाने में औसत पंद्रह-बीस मिनट लगते हैं। भीड़ बढ़ने पर डेढ़ से दो घंटा लग जाता है। प्रतिदिन औसत तीन सौ से पांच सौ रोगी ओपीडी में आते हैं।
दून के डॉक्टर सुबह 9 बजे के बाद अस्पताल की ओपीडी में आते हैं और एक-डेढ़ बजे के बीच ओपीडी छोड़ने लगते हैं। इस वजह से बहुत से रोगी डॉक्टरों को दिखा ही नहीं पाते। ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है।
पिछले दिनों निदेशक डा. एलके गुसाईं के निरीक्षण के दौरान डॉक्टर ओपीडी से नदारद मिले थे। उनके निर्देशों पर डॉक्टरों ने अमल नहीं किया। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. आरएस असवाल का कहना है कि मरीज न होने पर डॉक्टर उठ जाते होंगे।
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