वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते राजधानी सहित कुछ शहरों में पहले ही वायु प्रदूषण की समस्या बनी है। जहां औसतन आरएसपीएम (रेसपीरेबल ससपेंडेट पार्टीकुलेट मेटर) खतरे से डेढ़ गुना अधिक है। वही हरिद्वार में इससे भी बदतर स्थिति है।
आरटीआई में हुआ खुलासा
आरटीआई में इसका खुलासा हुआ है। ऐसे में छोटी और बड़ी दिवाली को इसका लेबल ढाई से तीन गुना अधिक बढ़ जाएगा। जो सांस और हार्ट के रोगियों के लिए बेहद खतरनाक होगा।
राजधानी में पहले ही खतरनाक स्थिति बनी है। अधिवक्ता सुयश कुकरेती द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से बताया गया है कि आरएसपीएम लेबल औसतन अधिक है।
वातावरण में जहर, शिकायत का है इंतजार
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रामनगर कार्यालय की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में बताया गया कि क्षेत्रीय कार्यालय ने सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषित क्षेत्रों को चिन्हित नहीं किया। जनता की शिकायत मिलने पर ही ध्वनि अनुश्रवण का कार्य किया जाएगा।
दून की स्थिति
पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषिण नियंत्रण बोर्ड ने वायु गुणवत्ता के वर्ष 2011 व 2012 के जो आंकड़े दिए है उसके अनुसार घंटाघर में आरएसपीएम 179.31, रायपुर कमर्शियल क्षेत्र में 163.87, आईएसबीटी रोड में 176 व नगर पालिका ऋषिकेश में 108 है। जबकि अधिकतम आरएसपीएम लेबल 100 से अधिक होना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
हरिद्वार का हाल
सिडकुल हरिद्वार में आरएसपीएम जनवरी वर्ष 2013 में 126.55, फरवरी में 137.84, मार्च में 120, अप्रैल में 125 एवं मई में 116 रहा है।