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आरटीओ की जमीन पर मालिकाना हक को लेकर विवाद

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संभागीय परिवहन कार्यालय की जमीन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक व्यक्ति ने जिस जमीन पर आरटीओ कार्यालय बना है उसे अपनी जमीन बताते हुए अदालत में वाद दाखिल कर दिया है। अदालत के आदेश पर प्रकरण की जांच करने के साथ ही जमीन के पैमाइश की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दूसरी ओर आरटीओ का कहना है कि कार्यालय सरकारी जमीन पर बना हुआ है और मालिकाना हक को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद नहीं है।
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एक व्यक्ति ने संभागीय परिवहन कार्यालय की भूमि पर मालिकाना हक जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की हुई है, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जिला प्रशासन को प्रकरण की जांच करने व नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्रकरण की जांच सहायक कलेक्टर - प्रथम श्रेणी द्वारा की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से दस्तावेजों के मुताबिक आरटीओ कार्यालय की जमीन की पैमाइश होनी है। जिसके लिए 30 जुलाई की तिथि भी निर्धारित की गई थी लेकिन परिवहन अधिकारियों की गैरमौजूदगी के चलते कार्यालय की भूमि की पैमाइश की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई। ऐसे में अब नए सिरे से कार्यालय की जमीन की पैमाइश होनी है। जिसके लिए आरटीओ डीसी पठोई ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को निर्देशित किया है कि वह जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर कार्यालय की जमीन की दस्तावेजों के मुताबिक पैमाइश कराए।
आरटीओ डीसी पठोई का कहना है कि प्रकरण विभागीय संपत्ति से संबंधित है। जिसमें लापरवाही के कारण विभागीय क्षति की आशंका बनी हुई है। ऐसे में जमीन की पैमाइश कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। आरटीओ का यह भी कहना है कि दफ्तर सरकारी जमीन पर बना हुआ है और किसी भी व्यक्ति की निजी जमीन पर सरकारी कार्यालय बनाना संभव नहीं है। दूसरी ओर इस संबंध में जब दूसरे पक्ष की ओर से जानकारी चाही गई तो किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पाया।
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