राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस के संगठन मुखिया इस बार अपनी ही सीट के फेर में उलझे हैं। जिन कंधों पर अपने दल को बहुमत से जिताकर सरकार बनवाने की जिम्मेदारी है, उन्हें इस बार खुद के विधानसभा पहुंचने में कई व्यवधान नजर आ रहे हैं।
सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय पिछली बार टिहरी से चुनाव लड़े थे। मगर उन्हें निर्दलीय दिनेश धनै ने पटखनी दे डाली। सरकार को समर्थन देने के बदले दिनेश धनै को खासी तरजीह मिल रही है। सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर आसीन धनै को कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली हुई है।
धनै मुख्यमंत्री के करीबी भी माने जाते हैं। इस वजह से कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई है, जिसमें एक धड़ा पूरी तरह किशोर के पक्ष में एकजुट है। लेकिन यह चर्चा भी आम है कि इस बार धनै को टिहरी विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। ऐसे में किशोर के इस सीट से चुनाव लड़ने पर भी संशय है।
उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को लेकर पहले ही खेमेबाजी चरम पर है। रानीखेत से पिछली बार विधानसभा चुनाव में मामूली मार्जिन से जीतक र आए भट्ट के सामने करन माहरा मजबूती से खड़े हैं। कांग्रेस प्रत्याशी माहरा पिछली बार मात्र 78 वोट से चुनाव हारे थे।
माना यह भी जा रहा है कि रानीखेत सीट से इस बार कड़ी चुनौती मिलती देख भट्ट इस सीट को छोड़ किसी अन्य जगह से दावेदारी करने के मूड में हैं। कुल मिलाकर दोनों संगठनों के मुखिया अपनी सीट के संकट से फिलहाल उबरते नजर नहीं आ रहे हैं।
टिकट किसे दिया जाएगा, यह काम सेंट्रल इलेक्शन कमेटी का है। अभी तो मेरा और हरीश रावत का ही टिकट नहीं तय है तो औरों की क्या बात की जाए।
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश अध्यक्ष (कांग्रेस)
रानीखेत में हमेशा बेहद कम मार्जिन से ही जीत-हार होती आई है। पिछले चुनाव के मद्देनजर इस बार अधिक मार्जिन से जीतने की तैयारी है। अन्य किसी सीट पर जाने का सवाल ही नहीं है।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष (भाजपा)