खटीमा और रामगंगा परियोजना की टरबाइनें करीब एक माह से शांत हैं। यूपी सिंचाई विभाग के पानी न छोड़ने से यह दिक्कत आई है। इससे उत्तराखंड को रोजाना 50 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की 198 मेगावाट की रामगंगा परियोजना 27 अक्तूबर से बंद हैं। चार नवंबर से 41.40 मेगावाट की खटीमा परियोजना की टरबाइनें भी नहीं घूम पा रही हैं। दरअसल, वहां नदियों से पानी रोकने या छोड़ने पर यूपी सिंचाई विभाग का अधिकार है।
सिंचाई की जरूरत न होने पर यूपी पानी छोड़ना बंद कर देता है। यूजेवीएनएल अधिकारी पिछले एक महीने में यूपी के अधिकारियों से कई बार वार्ता कर चुके हैं। उत्तराखंड ने यह तर्क भी रखा है कि प्रदेश में बर्फ कम पिघलने की वजह से नदियों में पानी कम है। जिससे दूसरी जल विद्युत परियोजनाओं से भी बहुत कम मात्रा में बिजली मिल पा रही है।
प्रदेश में बिजली संकट को देखते हुए दोनों परियोजनाओं के चलाए जाने की जरूरत है। लेकिन यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारी पानी छोड़े जाने पर राजी नहीं हुए हैं।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि इन दोनों परियोजनाओं से प्रतिदिन मिलने वाली औसतन 15 लाख यूनिट बिजली यूपीसीएल उपभोक्ताओं को आपूर्ति करता है। ये बिजली न मिलने से खुले बाजार से अतिरिक्त बिजली खरीद की मात्रा बढ़ रही है।
यूपी सिंचाई विभाग को जब जरूरत नहीं होती तब वह पानी छोड़ना बंद कर देता है। उनके अधिकारियों से वार्ता भी हुई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बहुत जल्द प्रमुख सचिव ऊर्जा और हम खुद लखनऊ में यूपी शासन के अधिकारियों से इस संबंध में वार्ता करेंगे।
- एसएन वर्मा, प्रबंध निदेशक यूजेवीएनएल