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'ऐसे नहीं संभल पाएगी उत्तराखंड की विरासत'

Sat, 19 Oct 2013 11:37 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में आयोजित हो रहे विरासत कार्यक्रम का लोग हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन इस बार विरासत के पहले दिन ही उत्तराखंड की 'विरासत' का अपमान किया गया।
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शुक्रवार को कार्यक्रम के पहले दिन न ही छोलिया नृत्य हुआ और जागर गायिका बसंती बिष्ट को बार-बार मंच से उठा दिया गया। और तो और कार्यक्रम शेड्यूल के अनुसार कलाकार नहीं पहुंचे। जिससे तय समय से कुछ शुरू नहीं हो पाया। केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली भी कार्यक्रम में नहीं आए।

बीच में ही रोक दिया गया जागर
विरासत में शेड्यूल के हिसाब से पहले कार्यक्रम का उद्घाटन होना था। उसके बाद बसंती बिष्ट का जागर, लेकिन मुख्य अतिथियों के समय पर नहीं पहुंच पाने की स्थिति में बसंती को मंच पर बिठा जागर की शुरुआत करा दी गई।
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जैसे ही उन्होंने टीम संग जागर गाना शुरू किया तो पांच मिनट बाद उन्हें कहा गया कि मुख्य अतिथि आ गए हैं। वह जागर रोक उठ जाएं। बसंती मंच से उठ गईं लेकिन मुख्य अतिथि नहीं आए। कुछ देर बाद फिर से उन्हें मंच पर बैठने को कहा गया।

बसंती ने एक बार फिर से टीम सहित नरसिंह जागर गाना शुरू किया। कुछ क्षणों बाद ही कहा गया कि मुख्य अतिथि आ गए हैं उठ जाइए। जब दो बार बसंती देवी को उठने को कहा गया तो वह उठ तो गईं, लेकिन कुछ समझ नहीं पाई।

इन्हें दोष लग सकता है...
बसंती ने कहा कि इस तरह व्यवहार आठ सालों में पहली बार मेरे साथ हुआ। ऐसा क्यों किया गया, मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा। मैं आयोजकों से बात करूंगी। उन्होंने कहा कि यदि नरसिंह जागर पूरा नहीं होता तो ऐसे में इन्हें दोष लग सकता है।

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यह कहते हुए वह आयोजन स्थल से चलती बनीं। बाद में ओएनजीसी के सीएमडी सुधीर वासुदेव, गणेश जोशी सहित अन्य अतिथियों ने दीप-प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत कराई। इस मौके पर जसवंत मॉडर्न स्कूल के छात्रों ने प्रस्तुति दी।

हरिप्रसाद की बांसुरी पर श्रोता मंत्रमुग्ध
पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने अपनी बांसुरी पर रूपक ताल में कलारंजनी राग गाया। हरिप्रसाद के बांसुरी की धुन सुनकर सभी श्रोता कार्यक्रम से बंधे नजर आए। तबले पर उनका साथ दिया उस्ताद राशिद ने। बांसुरी वादन में उनके शिष्य संतोष ने सहयोग दिया। तानपुरे में बबीता आनंद ने साथ दिया।

नहीं हुआ छोलिया नृत्य
उत्तराखंड की संस्कृति को बढ़ावा दिए जाने के नाम पर रीच संस्था कई दिनों से जिस छोलिया नृत्य का गाना गा रही थी, शुक्रवार को वह नृत्य गायब था। बाकायदा लिस्ट में नाम देकर मीडिया को संतुष्ट करने वाले आयोजकों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं था।

कई लोग बार-बार छोलिया नृत्य के बारे में पूछते रहे, लेकिन उसकी जगह दिखाई गई तो एक स्कूल की प्रस्तुति। यही नहीं कार्यक्रम की शुरुआत सात बजे होनी थी जो आठ बजे हुई। बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया की प्रस्तुति साढ़े सात बजे होनी थी जो पौने नौ बजे से शुरू हुई।

भाषण में आपदा का दर्द
भले ही आयोजकों के पास उत्तराखंड का दर्द समझने-जानने का समय ना हो, कलाकारों को मंच देने में उन्हें शर्म महसूस होती हो, लेकिन यहां भाषण में जरूर आपदा के बारे में चर्चा होती रही।

बाकायदा दो मिनट का मौन रखवाया गया। ओएनजीसी के सीएमडी सुधीर वासुदेव ने कहा कि आपदा के चार महीने बाद अब कहीं जाकर उत्तराखंड धीरे-धीरे अपनी पुरानी स्थिति में लौट रहा है।
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