उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस में घनघोर अंदरूनी रस्साकशी चल रही है।
प्रदेश के नेता स्थानीय चेहरों को मौका देने के हक में लॉबिंग कर रहे हैं तो राहुल गांधी के सहारे प्रकाश जोशी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं। जोशी का उत्तराखंड के तमाम कांग्रेसी नेता जमकर विरोध कर रहे हैं।
पार्टी नेता जोशी की जगह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को राज्यसभा भेजने की वकालत कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस इकाई के अलावा मुख्यमंत्री हरीश रावत भी उपाध्याय की दावेदारी को समर्थन दे रहे हैं।
मगर राहुल गांधी अगर जोशी के नाम पर अड़ते हैं तो मुख्यमंत्री के लिए इसे अनसुना करना आसान नहीं होगा। किसी बाहरी उम्मीदवार को उत्तराखंड से राज्यसभा भेजने के तरीके का विरोध प्रदेश कांग्रेस में मुखर हो गया है।
बहुगुणा ने की सोनिया गांधी से बात
ऐसी स्थिति में प्रकाश जोशी, किशोर उपाध्याय और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का नाम चर्चा में है। बहुगुणा ने दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी की है।
जोशी भले ही उत्तराखंड से हैं, लेकिन फिलहाल वे केंद्रीय राजनीति में हैं और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव हैं। वैसे जोशी विधानसभा चुनाव में मात खा चुके हैं।
प्रदेश कांग्रेस के नेता उन पर दिल्ली में ही रहने और प्रदेश की राजनीति से खुद को दूर रखने का आरोप लगाते हैं। किशोर उपाध्याय भी पिछला विधानसभा चुनाव कुछ वोटों से हार गए थे।
लेकिन प्रदेश कांग्रेस इकाई उनको स्थानीय चेहरे के नाम पर राज्यसभा में भेजने की पैरवी कर रही है। प्रकाश जोशी अभी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में राष्ट्रीय सचिव हैं। उनके पास उत्तर प्रदेश का प्रभार है।
अपनी खाई खुद खोद रही कांग्रेस
अंतर्कलह, धड़ेबाजी और अपनों पर मेहरबानी से कांग्रेस में उपज रहा अंदरूनी असंतोष अब सामने आने लगा है। सरकार के भीतर मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।
मुख्यमंत्री के एक करीबी (रंजीत रावत) से खनन के मुद्दे पर हुए टकराव के बाद सिंचाई मंत्री के इस्तीफे की पेशकश बहुत कुछ बयां कर रही है। नेता अपने-अपने हित साधने में लगे हैं। राज्य हित को लेकर कोई भी आमने-सामने नहीं आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कोसी नदी में खनन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के एक करीबी और सिंचाई मंत्री के बीच तलवारें खिंच गई। सिंचाई मंत्री के एकाधिकार को तोड़ते हुए मुख्यमंत्री के करीबी एक नेता ने अपने लोगों को भी उतार दिया।
दोनों नेताओं के बीच फोन पर जमकर कहासुनी हुई। सिंचाई मंत्री ने इस्तीफे की पेशकश की। गुरुवार को समीक्षा बैठक के दौरान भी सिंचाई मंत्री देहरादून में नहीं थे। सिंचाई मंत्री के दोनों मोबाइल नंबर स्विच आफ हैं।
हल्द्वानी बंगले से बताया गया कि साहब परिवार सहित राज्य से बाहर गए हैं। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री बदलने के साथ ही राज्य में ठाकुर लाबी के नेताओं का एक धड़ा खासा सक्रिय हो गया था। मुख्यमंत्री के करीबी एक नेता को तो सचिवालय में बैठने के लिए कमरा आवंटित किया गया है।