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दिग्गजों के पाट में पिस रहे कार्यकर्ता

Tue, 10 Sep 2013 11:50 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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भाजपा दिग्गजों के ‘पाटों’ के बीच में पार्टी का कार्यकर्ता पिस रहा है। इस चक्कर में मोर्चों की कार्यकारिणी चौबीस घंटे नहीं चल पाई और भंग हो गई।
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दिग्गजों के चहेतों के एडजस्ट न हो पाने से ‘वितंडावाद’ फैल गया। महानगर अध्यक्ष नीलम सहगल का कहना है कि वह दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं के सामने यह मामला उठाएंगीं। इसमें मुख्य मामला भाजयुमो के अध्यक्ष के पद को लेकर है। पार्टी के एक हैवीवेट विधायक अपने चहेते को यह पद दिलाना चाहते थे।

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इसको लेकर बंगला बैठकों में रणनीति बन रही थी कि महानगर अध्यक्ष ने शनिवार रात आनन-फानन में मोर्चों की कार्यकारिणी घोषित कर दी। इसके बाद ‘कैंची चलने’ का दौर शुरु हो गया। सबसे पहले महानगर प्रभारी विजय प्रकाश ने पत्र जारी करके मोर्चों की कार्यकारिणी निरस्त किए जाने की घोषणा की।
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क्या उन्हें कार्यकारिणी निरस्त करने का अधिकार है? विजय प्रकाश ने कहा कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने अधिकार दिया है। बाद में भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ थपलियाल ने फैक्स भेजकर बताया कि उनकी सहमति के बिना मोर्चे की कार्यकारिणी घोषित की गई है, लिहाजा वह इसके निरस्तीकरण की घोषणा करते हैं।

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लेकिन बाद में सरगर्मी बढ़ने पर सौरभ ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। महानगर अध्यक्ष नीलम सहगल का कहना था कि उन्होंने सौरभ थपलियाल की सहमति से यह घोषणा की थी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि एक विधायक सचिन गुप्ता को भाजयुमो अध्यक्ष बनवाना चाहते थे।
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भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष संतोष सेमवाल को अध्यक्ष बनवाना चाहते थे और महानगर अध्यक्ष सहगल की पसंद राजेंद्र सिंह ढिल्लो रहे हैं। महानगर अध्यक्ष कहती हैं कि लोकसभा चुनाव आगे है। उन्हें पार्टी चलानी है। ऐसे पदाधिकारी चाहिए जो कायदे से काम कर सकें।

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