उत्तराखंड के दो क्षत्रपों के बीच एक बार फिर तलवारें म्यान से बाहर आ गई हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत और मंत्री हरक सिंह रावत के बीच मंगलवार को हुई तल्ख बयानबाजी ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति को गरम कर दिया है।
वहीं अब तक अपनी बारी के इंतजार में बैठे सीएम कैंप के विधायक भी सरकार की कार्यप्रणाली और आपदा से जुड़े कामों पर सवाल उठा रहे हैं। अभी तक विरोधी कैंप के बयानों को हंसकर टालने और गोलमोल जवाब देने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंत्री हरक सिंह रावत के बयानों पर सीधी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
दरअसल केदारनाथ की विधायक शैला रानी रावत के इस बयान पर कि सीएम को कैबिनेट की बैठक केदारघाटी में नहीं बुलाई जानी चाहिए। इस पर मंत्री हरक सिंह रावत ने मीडिया में बयान दिया है कि केदारघाटी में कैबिनेट की बैठक का कोई औचित्य नहीं है।
ऐसा लगेगा कि सारे मंत्री वहां पर्यटक के तौर पर जा रहे हैं। हमें देहरादून में ही कैबिनेट की बैठक बुलानी चाहिए थी जिसका एजेंडा और पूरा फोकस केदारघाटी से जुड़ी योजनाओं पर होना चाहिए।