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डकैती का खुलासा: बाल-बाल बचा बत्रा परिवार, मंसूबा पूरा नहीं हुआ तो ईश्वरन के घर पहुंचे लुटेरे

Wed, 02 Oct 2019 03:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • थोड़ी सजगता और थोड़ी खुशकिस्मती आई काम, परिवार नहीं आया डकैतों के झांसे में
  • घर में घुसने के लिए गैंग नहीं किया था भाजपा विधायक के नाम का इस्तेमाल
  • बिल्डर ने घर के बजाय आफिस में आने की बात कहकर किया था वापस
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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कुछ सजगता और कुछ खुशकिस्मती थी कि बिल्डर राकेश बत्रा का परिवार डकैती का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। डकैत ने 250 किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली से बत्रा परिवार को लूटने आए थे। शातिर दिमाग बदमाशों ने बत्रा परिवार पर विश्वास जमाने के लिए रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा के नाम का सहारा भी लिया था। लेकिन, बत्रा को शक हो गया कि ये लोग आफिस के बजाय कोठी पर कैसे पहुंच गए। बिल्डर ने व्यस्त होने की बात कहकर एक-दो दिन में आफिस आने को कहा था। यहां मंसूबा पूरा नहीं होने के बाद गैंग ने ईश्वरन को निशाना बनाया।

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बीएसएफ से बर्खास्त डिप्टी कमांडेंट वीरेन्द्र ठाकुर के साथ यह गैंग 22 सितंबर की सुबह शहर कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मण चौक इलाके में बिल्डर राकेश बत्रा के घर पर डाका डालने पहुंच गया था। एसपी सिटी श्वेता चौबे के मुताबिक दून चौक पर सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन करने के बाद गैंग शाम को बत्रा परिवार को लूटने के इरादे से पहुंच था। कालोनी के गेट पर गार्ड ने रोका तो बदमाशों ने राकेश बत्रा के घर जाने की बात कही। गार्ड ने उन्हें अंदर भेजने से पहले बत्रा की पत्नी से उनकी बात कराई। पता चला राकेश बत्रा घर पर नहीं हैं। इसके बाद बत्रा की पत्नी ने कांफ्र्रेंस के जरिये अपने पति से बदमाशों की बात कराई। बदमाशों ने रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के नाम लेकर भवन निर्माण के संबंध में बात करने का झांसा दिया। इस पर बत्रा ने उनसे सवाल किया कि वे आफिस के बजाय घर कैसे पहुंच गए। शक हुआ तो बत्रा ने व्यस्त होने की बात कहकर एक दो दिन में आफिस आने की बात कहकर फोन काट दिया।

बत्रा के घर डकैती की साजिश नाकाम होने के बाद गैंग वापस दिल्ली जाने की तैयारी में था। इसी बीच लोकल मुखबिर मुजिब्बुर रहमान उर्फ पीरू ने दूसरे शिकार के रूप में अभिमन्यु क्रिकेट एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन का नाम बताया। मुखबिर का कहना था कि यहां भी काफी माल मिल सकता है। ईश्वरन के यहां इनकम टैक्स का छापा पड़ चुका है। बिना देर गैंग अपने नए मिशन की तरफ बढ़ गया। कोठी के बाहर चहल-पहल होने के कारण गैंग मसूरी रोड पर काफी देर कार से भटकता रहा। कुछ देर बाद वापस आकर चार बदमाश कोठी के अंदर घुस गए, जबकि सरगना वीरेन्द्र ठाकुर बाहर ही कार में बैठा रहा। डकैती की घटना को अंजाम देकर गिरोह रातों-रात दिल्ली निकल गया था।
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आयकर के छापे के बाद गैंग की निगाह में चढ़े थे ईश्वरन 

पकड़ में आया गैंग देश भर की तमाम घटनाओं से अपडेट रहता था। खासतौर से उन मामलों में जहां आयकर के छापे पड़ते थे। ईश्वरन भी तभी उनकी हिटलिस्ट में आ गए थे, जब आयकर की टीम ने उनके यहां जांच पड़ताल की थी। लोकल मुखबिर से जानकारी जुटाने के बाद घटना अंजाम दी गई थी। पुलिस जांच पड़ताल में आया है कि गैंग काला धन रखने वालों पर अपनी नजर रखता था।

दहशत के चलते पुलिस को देरी से बताई घटना
अभिमन्यु एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि लुटेरे जाते समय परिवार के सदस्यों की हत्या करने की धमकी देकर गए थे। वो बार-बार क्रिकेटर बेटे अभिमन्यु ईश्वरन का नाम लेकर आतंकित कर रहे थे। दहशत के चलते पुलिस को करीब 45 मिनट बाद घटना की सूचना दी थी। पुलिस ने जिस ढंग से घटना का खुलासा किया है, उससे कानून में उनका आस्था और प्रगाढ़ हुई है। यही कारण है कि वो अपनी तरफ से पुलिस टीम को एक लाख 51 हजार रुपये का नगद पुरस्कार दे रहे हैं।  

बेस्ट विवेचना का मिल सकता है खिताब
ईश्वरन लूटपाट की विवेचना को बेस्ट विवेचना का खिताब मिल सकता है। एसएसपी ने बताया कि डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए बेस्ट विवेचना का अवार्ड का आश्वासन दिया है। उन्हाेंने बताया कि एसपी सिटी श्वेता चौबे ने दो दिन तक दिल्ली में रहकर पूरे आपरेशन की कमान संभाली है। उनकी अगुवाई में पूरी कार्रवाई हुई है।  

पुलिस टीम की सराहना 
एसपी सिटी श्वेता चौबे की अगुवाई में सीओ मसूरी अरविंद सिंह रावत, एसओजी प्रभारी ऐश्वर्य पाल, डालनवाला इंस्पेक्टर राजीव रौथाण, एसओ राजपुर अशोक राठौर, एसओ नेहरू कालोनी दिलबर नेगी, एसओ क्लेमेंटाउन नरोत्तम बिष्ट, उप निरीक्षक यासीन, योगेश पांडेय, आशीष रावत, ज्योति प्रसाद उनियाल, दीपक द्विवेदी, एसओजी के कांस्टेबल देवेन्द्र ममगाई, अमित, ललित, प्रमोद, आशीष, पंकज, देवेन्द्र, महिला कांस्टेबल मोनिका और अमरेन्द्र सिंह टीम में शामिल रहे। 

कप्तान जोशी की टीम के नाम एक और उपलब्धि 
हाईप्रोफाइल डकैती की घटना का खुलासा कर निसंदेह कप्तान अरुण मोहन जोशी की टीम ने अपने नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। यातायात और अतिक्रमण की दिशा में कारगर रणनीति के बाद एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी पकड़ का अहसास कराया है। लूटपाट के सबसे बड़े घटनाक्रम में पुलिस का प्रोफेशनल अंदाज वाकई काबिल तारीफ है। अरुण मोहन जोशी को एसएसपी का कार्यभार संभाले दो माह पूरे होने को है। कानून व्यवस्था के लिहाज से अभिमन्यु एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन के यहां हुई लूटपाट का अनावरण किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। 
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कार की बदौलत पुलिस गिरोह के गिरेबान तक पहुंची

अभिमन्यु एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन की कोठी में लूटपाट प्रकरण में प्रयुक्त बीट कार का नंबर एक माह पुराने रिकार्ड से ‘क्लिक’ हुआ। देवबंद के टोल प्लाजा से होकर एक माह में गुजरे लाखों वाहनों का डाटा खंगालकर लुटेरों के कार का असली नंबर ढूंढा गया। 28 अगस्त को यह गैंग दून में रेकी करने के बाद वापस गया था। इसी कार की बदौलत पुलिस गिरोह के गिरेबान तक पहुंचने में कामयाब हो गई।

शातिर गैंग पुलिस की हर चाल से वाकिफ थे कि वो कहां कानून के शिकंजे में आ सकते है। देहरादून आने से पहले ही लुटेरों ने दिल्ली में अपने मोबाइल बंद कर दिए थे। लूटपाट के दौरान देहरादून से लेकर गाजियाबाद की सीमा तक किसी ने मोबाइल का प्रयोग नहीं किया था। बदमाशों को सिर्फ सीसीटीवी कैमरों में तस्वीर आने का अंदेशा था। 

वीरेन्द्र को डीआईजी पुकारते है गैंग के सदस्य
गिरोह के सरगना वीरेन्द्र ठाकुर को सदस्य डीआईजी के रुप में संबोधित करते हैं। दिल्ली के छतरपुर निवासी 2000 में रिश्वत के मामले में बर्खास्त हुआ था। बर्खास्तगी के बाद वीरेन्द्र की दिशा बदल गई और वह अपराध की दुनिया में उतर गया। एसएसपी अरुण मोहन जोशी की माने तो वीरेन्द्र काफी घटनाएं अंजाम दे चुका है, लेकिन उसका नाम कभी सामने नहीं आया। पहली बार वह पुलिस पकड़ में आया है। पुलिस पूछताछ के दौरान वीरेन्द्र ने लूटपाट करना अब उसकी आदत में शुमार हो गया। उनका काफी समय शिकार की रैकी और घटना को अंजाम देने में बीतता है। 

अच्छे क्रिकेटर के रुप में थी अदनान की पहचान
डकैती में पकड़े गए मोहम्मद अदनान की पहचान नई दिल्ली के सदर बाजार इलाके में अच्छे क्रिकेटर के रुप में हुई है। वो क्रिकेटर बनना भी चाहता था, लेकिन क्रिकेट के सट्टे ने उसकी जिंदगी को बदल दिया। सट्टे में नुकसान के बाद अदनान चोरी के धंधे में उतर गया। उसके खिलाफ दिल्ली के बुरारी, समाईपुर और भलसवा में करीब सात मुकदमे दर्ज है। दून में दो घरों में हुई डकैती में अदनान ने किसी तरह की मारपीट करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। वो बराबर साथियों को खून-खराबे करने से इंकार करता रहा। 

लुटेरों को सैलून संचालक करता रहा अपडेट
अभिमन्यु एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन के आवास पर लूटपाट के बाद लोकल मुखबिर मुजिब्बुर रहमान उर्फ पीरू पुलिस की गतिविधियों को लेकर अपने साथियों को अपडेट करता रहा। एसपी सिटी श्वेता चौबे के मुताबिक पीरू ने बताया था कि पुलिस गलत कार को ढूंढ रही है। इस कारण बदमाश आश्वस्त थे कि पुलिस अभी उनसे दूर है, लेकिन जाखन में मोबाइल रखते हुए तस्वीर आने का खतरा उन्हें जरूर था। 

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