उत्तराखंड सरकार की उपेक्षा के शिकार नाल्ड कठूड़ क्षेत्र के आपदा प्रभावित भी जंगल से एक-एक लकड़ी लाकर इन दिनों भागीरथी पर पुल बांधने में जुटे हैं।
आपदा में बह गया था डिडसारी झूला पुल
ग्रामीणों का यह प्रयास आपदा के पांच माह बाद भी जनजीवन को पटरी पर लाने में नाकाम प्रशासन को आईना दिखा रहा है। जून माह की प्रलयंकारी बाढ़ में डिडसारी, लौंथरू एवं बायणा गांव की आवाजाही मुख्य साधन भागीरथी पर बना डिडसारी झूला पुल बह गया था।
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तब से ग्रामीण जंगल के रास्ते पहाड़ी पगडंडी से दो किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर सड़क तक पहुंच पा रहे हैं। आपदा को पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन यहां पुल का निर्माण तो दूर ट्राली तक नहीं लगवा पाया। सरकारी तंत्र के उपेक्षित रवैये से आहत ग्रामीणों ने स्वयं ही भागीरथी पर अस्थाई पुल तैयार करने का बीड़ा उठाया।
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इसके लिए उक्त तीनों गांव के दो सौ परिवारों ने प्रति परिवार 200-200 रुपए एकत्र किया। डिडसारी के निवर्तमान प्रधान विजय राणा, सरिता कंसवाल एवं कमल डिमरी ने 5-5 हजार का सहयोग किया। आजकल ग्रामीण नदी किनारे वायरक्रेट बांधने के साथ ही जंगल से लकड़ी इकठ्ठा करने में जुटे हैं। ग्रामीण तीन दिन में अस्थाई पुल तैयार करने का दावा कर रहे हैं।
बीआरओ कर रहा सहयोग
पांच माह तक परिक्रमा के बाद भी भले प्रशासन ने ग्रामीणों की सुध नहीं ली, लेकिन बीआरओ पुल निर्माण में ग्रामीणों की मदद कर रहा है। बीआरओ ने न केवल ग्रामीणों को निशुल्क वायरक्रेट उपलब्ध कराए, बल्कि नदी के उस पार से बल्लियां खींचने के लिए अपनी मशीनें भी लगाई हैं।
आपदा के बाद से गांवों में जनजीवन पटरी से उतरा हुआ है। पुल न होने से गांव तक रसद पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन से पुल निर्माण की मांग कर थक चुके हैं। अब ग्रामीण स्वयं पैसा इकठ्ठा कर श्रमदान से अस्थाई पुल बना रहे हैं।
- विजय राणा, निवर्तमान ग्राम प्रधान डिडसारी
पुल बहने के बाद जंगल के रास्ते पहाड़ी पगडंडी से बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। पहाड़ी से पत्थर लुढ़कने तथा नीचे झील में गिरने का खतरा रहता है। ऐसे में बच्चे नियमित स्कूल भी नहीं जा पाते। अब पुल बन जाएगा तो बड़ी राहत मिलेगी।
- सरिता कंसवाल, निवर्तमान प्रधान बायणा
डिडसारी में भागीरथी का स्पान अधिक होने से ट्रॉली लग पाना संभव नहीं है। झूला पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। बजट मिलने के बाद ही पुल निर्माण का काम शुरू हो पाएगा।
- डीसी नौटियाल, एई लोनिवि भटवाड़ी
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