आपदा से प्रदेश की अफसरशाही कोई सबक सीखने को तैयार नहीं है। हाल यह है कि 16-17 जून के करीब पांच माह बाद अब नदियों में अचानक आने वाले उफान से बचाव का प्लान तैयार करने की कोशिश की जा रही है। केंद्र की ओर से नाराजगी जताने के बाद अब एक माह में प्लान तैयार होने की बात की जा रही है
आपदा प्रबंधन की योजना तक तैयार नहीं
केदारनाथ की आपदा के बाद सरकार ने आपदा प्रबंधन के कील कांटे दुरुस्त करने की बात की थी। उस समय बड़े-बड़े वादे किए गए। पर हाल यह है कि राज्य अभी तक आपदा प्रबंधन की अपनी योजना तक तैयार नहीं कर पाया है। इस काम को शुरू करने में ही करीब पांच माह का समय बीता दिया गया।
बरसात का प्रकोप झेल रहा
यह तब है जबकि पिछले तीन साल से उत्तराखंड लगातार भारी बरसात का प्रकोप झेल रहा है। 2010-11 की बरसात से करीब 14 हजार किलोमीटर सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई थी। 2011-12 में उत्तरकाशी में अस्सी के उफनाने से पूरे उत्तरकाशी जिले को अस्सी के प्रकोप का सामना करना पड़ा था। शासन के एक अधिकारी के मुताबिक प्लान को तैयार करने के लिए विभागों से फीडबैक मांगा गया है।
अब तक क्या हुआ
16-17 जून को केदार घाटी में भारी बरसात के कारण मंदाकिनी में उफान आने से पूरी केदारघाटी को तबाही से गुजरना पड़ा था। 70 के दशक की बिरही की बाढ़ के बाद की यह सबसे बड़ी तबाही थी और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब पांच हजार लोग इससे काल के ग्रास बने। चार हजार किलोमीटर से ज्यादा सड़क क्षतिग्रस्त हुई और करीब 140 पुल बह गए। सैकड़ों गांव इस आपदा से प्रभावित हुए।
भारी बरसात और नदियों के उफनाने से हुई इस तबाही के बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश से अचानक आने वाली इस तरह की बाढ़ से बचाव और निगरानी का तंत्र विकसित करने का प्लान तैयार करने को कहा था।
आपदा बीत जाने के करीब पांच माह बाद जाकर अब सरकारी नींद टूटी है। अब विभागों को आपदा प्रबंधन विभाग ने फीड बैक देने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि एक माह में यह प्लान तैयार हो जाएगा।
आगे क्या होगा
आपदा प्रबंधन का यह प्लान तैयार करने के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में इस प्लान का अनुमोदन होगा और इसके बाद ही यह प्लान केंद्र को भेजा जा सकेगा। शासन ने इसके साथ ही राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक की तैयारी भी शुरू कर दी है। प्राधिकरण के गठन से अब तक प्राधिकरण की मुश्किल से तीन बार बैठक हो पाई है।