उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड और प्रशासन की अनदेखी के चलते शक्तिनहर लगातार प्रदूषित हो रही है। नहर के किनारे कुल्हाल से नवाबगढ़ और डाक्टरगंज तक रोजाना कूड़े के ढेर लग रहे हैं। प्लास्टिक, पॉलीथिन समेत अन्य तरह की गंदगी हर दिन नहर में गिर रही है। यही नहीं डाकपत्थर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे नालाें का पानी भी सीधा नहर में गिर रहा है।
नहर में गंदगी गिरने का यह सिलसिला पांच सात साल पुराना नहीं है। यह सिलसिला 60 के दशक में नहर के निर्माण के बाद से लगातार चला आ रहा है। यह स्थिति तब है, जब स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगर निकायों के साथ ग्राम पंचायतों में घरों से कूड़ा उठान और निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। नालों को भी टेप कर सीवर लाइन से जोड़ने का काम चल रहा है। लोनी, तिकोना पार्क के पास बिल्कुल नहर के किनारे एक अस्थाई गोशाला बनी है। यहां दो जगह गोबर के ढेर लगे हैं। ऐसी ढाल बनाई गई है कि गोबर नहर में जा रहा है।
यूजेवीएनएल के अधिशासी अभियंता गिरीश चंद्र जोशी ने बताया कि शक्तिनहर के किनारे गंदगी न फेंकने के लिए ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा गया था। नहर के किनारे कूड़ेदान भी लगाए गए थे। जब रोक नहीं लगी तो एसडीएम को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई थी। अब जल्द गंदगी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।