निदेशक बनने से सामान्य कामकाज पर असर
विभाग में निदेशकों का कार्यकाल बहुत कम होने से उच्च शिक्षा में सामान्य कामकाज पर इसका असर पड़ रहा है। विभागीय अफसरों के मुताबिक, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग के बारे में इससे पहले कुछ समझ पाएं, उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि नजदीक आ जाती है। बहुत कम समय के लिए निदेशक बनने से सामान्य कामकाज पर असर पड़ रहा है। पदोन्नति एवं वित्त से संबंधित फैसलों पर निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। नए कार्यों को लेकर भी कोई फैसले नहीं हो पा रहे हैं।
नई शिक्षा नीति को लागू करना प्राथमिकता
उच्च शिक्षा विभाग के नवनियुक्त निदेशक जगदीश प्रसाद के मुताबिक, नई शिक्षा नीति को प्रभावशाली तरीके से लागू करना, महाविद्यालयों में फैकल्टी, भवन, लैब आदि की कमी को दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी। कहा कि सीएम प्रदेश को नॉलेज हब बनाना चाहते हैं, इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।
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विभाग में निदेशक पद के लिए एडवांस डीपीसी की गई है। एक निदेशक के सेवानिवृत्त होते ही दूसरे को निदेशक बनाया जा रहा है। बहुत कम समय के लिए निदेशक बनने से कामकाज पर असर पड़ रहा, जिसे देखते हुए डीपीसी में अब उन प्राचार्यों को ही शामिल करने पर विचार किया जा रहा, जिनकी सेवानिवृत्ति की अवधि कम से कम एक साल हो।
- डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री