महिलाओं में फिशर के कारण
डॉ. आकांक्षा बताती हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के दौरान पेल्विक क्षेत्र और गुदा पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे फिशर का खतरा बढ़ जाता है। फाइबर की कमी और पानी कम पीने से मल सख्त हो जाता है, जिससे गुदा की त्वचा में कट लग जाते हैं। लगातार दस्त होने से भी गुदा क्षेत्र में जलन और त्वचा को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा तनाव, मोटापा और आंतों की बीमारी (जैसे- क्रोहन रोग) भी फिशर का कारण बन सकते हैं।
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प्रमुख लक्षण
मल त्याग के दौरान तेज, चुभने वाला दर्द
मल त्याग के बाद भी घंटों तक जलन और दर्द का बने रहना।
गुदा के आसपास की त्वचा में सूजन या छोटा सा मस्सा बनना।
- बार बार दस्त और कब्ज भी फिशर के प्रमुख कारण हैं।
खानपान और तनाव पर दें ध्यान
डॉ. आकांक्षा बधानी बताती हैं कि फिशर जैसी समस्या से बचाव के लिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है। कहा कि पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार लेने और कब्ज जैसी परेशानी को नजरअंदाज न किया जाए। लंबे समय तक दर्द या अन्य परेशानी बनी रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।