मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भले ही अपने लिए राजनैतिक तौर पर सुरिक्षत धारचूला सीट चुनी हो, लेकिन भाजपा उन्हें घेरने की तैयारी में है।
हरीश रावत के पूर्व प्रतिद्वंद्वी और अल्मोड़ा लोकसभा सीट पर उन्हें हराने वाले बची सिंह रावत (बचदा) को पार्टी उनके मुकाबले उतार सकती है।
भाजपा के अंदर एक खेमा इस बात के लिए जुट गया है कि बचदा को धारचूला चुनाव के लिए तैयार किया जाए। फिलहाल इस सीट पर भाजपा नेता खुशहाल सिंह पिपलिया और शमशेर सिंह सत्याल का नाम दावेदारों में शामिल है।
विधायक हरीश धामी ने CM के लिए छोड़ी सीट
धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को विधानसभा सदस्यता दिलाने के लिए त्यागपत्र दिया है।
प्रदेश की खाली हुई तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए एक ओर जहां मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय कागजी तैयारियों में जुट गया है।
वहीं दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने एक बार फिर सीधे भिड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। दो विधानसभा सीट डोईवाला रमेश पोखरियाल निशंक और सोमेश्वर (सुरक्षित) सीट अजट टम्टा के लोकसभा सदस्य चुने जाने के कारण खाली हुई हैं।
बिटिया और टम्टा भाई को लड़ाना चाहते हैं निशंक
डोईवाला सीट खाली करने वाले निशंक अपना उत्तराधिकारी खोज रहे हैं। निशंक के चुनाव की कमान उनकी बेटी आरुषि पोखरियाल ने संभाली थी और राजनैतिक समझ भी रखती हैं।
लिहाजा निशंक पार्टी नेताओं को इस नाम पर राजी कराना चाहते हैं। आरुषि के टिकट न होने की स्थिति में निशंक अपने किसी खास का नाम आगे बढ़ाएंगे।
भाजपा में इस सीट को लेकर सबसे ज्यादा घमासान है। निशंक के पहले विधायक रहे त्रिवेन्द्र सिंह रावत रायपुर में हार के बाद एक बार फिर डोईवाला वापसी चाहते हैं।
रावत यहां से प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन परिसीमन के बाद इस सीट का जातीय मिजाज बदला है। इस सीट पर सुभाष बड़तवाल, हेमंत द्विवेदी, जिला पंचायत की उपाध्यक्ष रुचि भट्ट भी अपनी दावेदारी जता रही हैं।
डोईवाला के लिए सामने आए कई नाम
डोईवाला से मुख्यमंत्री की दावेवारी समाप्त होते ही कांग्रेस में कई नाम सामने आ गए हैं।
सूर्यवीर सिंह सजवाण, हीरा सिंह बिष्ट, एसपी सिंह के साथ मनीष नागपाल एक बार फिर दावेदारी जता रहे हैं। एसपी सिंह ने डोईवाला से पिछला चुनाव निर्दलीय लड़ा था।
हाल ही रेणुका रावत के समर्थन में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। जबकि मनीष नागपाल ने पिछले चुनाव में आखिर समय में पार्टी के कहने पर नाम वापस लिया था।
सूर्यवीर सिंह सजवाण और हीरा सिंह बिष्ट के पास लंबा अनुभव है लेकिन 2012 सजवाण देवप्रयाग और हीरा सिंह बिष्ट डोईवाला से कुछ अंतर से चुनाव हारे हैं।
सोमेश्वर पर उम्मीदवारी की मारामारी नहीं
सोमेश्वर सुरक्षित सीट होने की वजह से उम्मीदवारी को लेकर अधिक मारामारी तो नहीं है।
अजय टम्टा चाहते हैं पार्टी उनकी सीट पर भाई संजय टम्टा को उतार दे। संजय भी भाजपा से जुड़े हैं। जबकि लोकसभा टिकट में पीछे रहीं रेखा आर्य इस मौके को नहीं चूकना चाहती हैं।
रेखा ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट न देने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर थीं। रेखा के अलावा मोहनराम भी प्रबल दावेदारों में शामिल हैं।
कांग्रेस में मुख्यमंत्री इस सीट पर लोकसभा चुनाव हारे प्रदीप टम्टा की उम्मीदवार चाहते हैं। प्रदीप फिलहाल तो इंकार कर रहे हैं लेकिन पार्टी उन्हें बेहतर उम्मीदवार मान रही है। राजेन्द्र बाराकोटी एक बार फिर कांग्रेस केटिकट की दावेदारी कर रहे हैं।