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स्कूल में किताब हो खेत में अनाज हो के संकल्प के साथ धाद ने किया कैलेंडर जारी

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सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था धाद ने नव वर्ष-2022 पर अपने सामाजिक संकल्प के साथ कैलेंडर जारी किया है। कैलेंडर का लोकार्पण धाद स्मृति वन मालदेवता में संस्था के अतिथि और पदाधिकारियों ने किया।
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मुख्य अतिथि डॉ. मयंक डबराल ने कहा कि कोरोना की आपदा में धाद की पहल सराहनीय रही है। इसके साथ पिछले वर्ष की महामारी में जिन स्वास्थ्य कर्मियों ने जान गवांई है, उन्हें भी सार्वजनिक सम्मान दिए जाने की जरूरत है। इस सेवा के लिए उनकी स्मृति में स्मृतिवन में पौधा लगाया जाना चाहिए। धाद द्वारा हरेला अभियान के अंतर्गत विकसित किए जा रहे स्मृतिवन के बारे में सचिव नीना रावत ने बताया कि केवल डेढ़ साल के अंतराल में ही एक पथरीली जमीन को धाद ने आम समाज के सहयोग से हरा भरा कर दिया है। उत्तराखंड की ग्रामीण शिक्षा के पक्ष में धाद के कार्यक्रम %कोना कक्षा का% के संयोजक गणेश चंद्र उनियाल ने बताया कि 2018 में देहरादून से 28 विद्यालयों से शुरू हुआ कार्यक्रम अब तक उत्तराखंड के 494 विद्यालयों में अपनी पहुंच बना चुका है।
धाद की पहल फंची के बारे में सचिव किशन सिंह ने बताया कि उत्तराखंड हिमालय के अन्न और भोजन के पक्ष में धाद ने एक व्यापक वातावरण बनाने की पहल की है। इसमें पहाड़ी भोजन के सार्वजनिक आयोजन कल्यो भी किए जा रहे हैं।
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धाद के सचिव तन्मय ममगाईं ने बताया कि उत्तराखंड हिमालय में आपदा प्रभावित छात्रों की शिक्षा में सहयोग की संस्था ने पहल की है। जिसका प्रारंभ केदारनाथ आपदा के बाद हुआ। हर वर्ष की तरह इस वर्ष का कैलेंडर भी एक संकल्प पोस्टर है। जिसमें आने वाले समय के लिए एजेंडे जारी किए गए हैं। इस अवसर पर शास्त्री शिव प्रसाद ग्वाड़ी, अर्चना गवाड़ी, शोभा रतूड़ी, राकेश पांथरी, बिजेंद्र बलूनी, सुधांशु चौधरी, वीरेंद्र खंडूड़ी, अनुराधा खंडूड़ी, दीपा ग्वाड़ी, संजीव ग्वाड़ी, अनूप नैथानी, प्रमोद पंत, राजीव पांथरी, प्रभाकर देवरानी, बिजेंद्र रावत आदि मौजूद रहे।
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