उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का मंत्रियों को विभाग ना बांटना अब सरकार के लिए मुसीबत बन रहा है। विपक्ष की मानें तो संविधान के नियम-कानून के मुताबिक सदन में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।
विधानसभा अध्यक्ष भी मौन
विधानसभा अध्यक्ष भी अभी इस मामले में मौन हैं और निर्णय सुरक्षित कर लिया है। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्दयेश ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि राज्यपाल की अनुमति से ही मंत्री जवाब दे रहे हैं।
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नेता सदन हरीश रावत को बुधवार को ही बजट पर अपना भाषण देना था लेकिन उसे भी कल तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
दरअसल भाजपा विधायक मदन कौशिक और बंशीधर भगत ने बजट में सामान्य चर्चा के दौरान सदन में व्यवस्था का सवाल उठा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्रों को दिखाते हुए कहा कि अभी विभाग नहीं बंटे हैं ऐसे में मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते हैं कि कौन मंत्री किस विभाग पर जवाब देगा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को विभाग बंटवारे पर राज्यपाल का अनुमोदन आवश्यक है।
नियमों का हवाला
ऐसे में सरकार ने जो दो विधेयक पारित कराए हैं वह भी मान्य नहीं होंगे। वहीं बृहस्पतिवार से विभागों के बजट पर चर्चा होनी है उसे लेकर भी दिक्कत आ रही है। विपक्ष के इस सवाल पर मंत्री इंदिरा ह्दयेश और एसएस नेगी ने भी नियमों का हवाला दिया।
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उन्होंने यह भी बताया कि राज्यपाल से अनुमति ली गई है, लेकिन विपक्ष केबार-बार पीठ से व्यवस्था देने पर अध्यक्ष ने निर्णय सुरक्षित कर लिया।
भाजपा विधायकों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि बजट पर नेता सदन को भाषण देना था और अभी तक विभागों के बजट सदस्यों तक नहीं पहुंचे हैं।
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विधानसभा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठे उपसभापित अनसूया प्रसाद मैखुरी ने बजट पर चर्चा को बृहस्पितवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
पहली बार मैखुरी को मौका
विधानसभा में पहली बार उपसभापति अनसूया प्रसाद मैखुरी को सही मायने में काम मिला। पहला मौका है जब विधानसभा अध्यक्ष को चलते सत्र के बीच उठकर जाना पड़ा।
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जिसके बाद उपसभापति अनसूया प्रयाद मैखुरी ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई। चूंकि उपसभापति सवाल-जवाब में शामिल नहीं हो सकते इसलिए मैखुरी के लिए भी सुखद था। उनके आसन पर बैठते ही कई विधायकों ने उन्हें बधाई दी।