तहसील क्षेत्र के ग्राम रुईसांण के निवासी और 19आरआर बटालियन के सूबेदार राजेंद्र सिंह का पैतृक घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। वे 24 अक्तूबर की रात को गश्त के दौरान गोली चलने से जम्मू- कश्मीर के अनंतनाग क्षेत्र में शहीद हो गए थे।
रविवार को सेना के वाहन से शहीद का शव थराली से होते हुए पैतृक गांव रुईसांण पहुंचाया गया। इस मौके पर माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया था। शहीद के 70 वर्षीय पिता त्रिलोक सिंह, मां गांवली देवी रोते-रोते बेहोश हो गए।
छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर गए
राजेंद्र सिंह एक माह पहले ही 60 दिन की छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर गए थे। उन्हें नवंबर में 15 दिन की छुट्टी लेकर अपने भतीजे की सगाई के लिए घर पहुंचना था। मृतक अपने पीछे वृद्ध माता-पिता सहित पत्नी सुशीला देवी और तीने बेटों को छोड़ गया है।
उनका बड़ा बेटा योगेंद्र भी सेना में है। जबकि दो छोटे बेटे पढ़ रहे हैं। गांव से शव को प्राणमति के तट पर स्थित पैतृक घाट लाया गया, जहां सिख रेजीमेंट रुद्रप्रयाग और गढ़वाल स्काउट जोशीमठ के जवानों ने शस्त्र झुकाकर भावभीनी अंतिम विदाई दी।
अचानक गोली चलने से मौके पर ही मौत
शहीद के शव के साथ यहां पहुंचे नायक सूबेदार योगेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 24 अक्तूबर को जिला अनंतनाग के राजोरी सेक्टर में रात करीब 10 बजे गश्त कर रहे थे।
इसी दौरान अचानक गोली चलने से सूबेदार राजेंद्र सिंह मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मौके पर एसडीएम विवेक प्रकाश, सब इंस्पेक्टर अनिरुद्ध मैठाणी सहित कई लोग मौजूद थे।