दुआ के एक कार्यक्रम में देहरादून आ रहे देवबंद के मौलाना सैयद माबूद पुलिस प्रशासन की टोकाटाकी से इतने खफा हुए कि टिहरी लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बन गए।
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साथ ही देवबंद के मासूम शाह हरिद्वार से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे चुनाव लड़कर कांग्रेस को सबक सिखाएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने दी थी धमकी
मरकज-ए-औलिया के बैनर तले तिब्बती मार्केट स्थित एक रेस्टोरेंट में दुआ का कार्यक्रम था। संगठन के महामंत्री सुल्तान ने बताया कि जब देवबंद के पूर्व शिक्षक मौलाना सैयद माबूद शहर पहुंचे तो पुलिस प्रशासन ने काफी परेशान किया।
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लोगों को लौटा दिया। साथ ही कुछ कांग्रेस नेताओं ने उन्हें धमकी दी है। मौलाना माबूद मरकज-ए-औलिया के अध्यक्ष भी हैं।
कांग्रेसियों की धमकी की वजह से मौलाना सैयद माबूद और मासूम शाह को चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया गया है।
जिस कांग्रेसी नेता ने उन्हें धमकी दी है उसका नाम और मोबाइल नंबर उन्हें पता है। जरूरत पड़ी तो उस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।
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इस दौरान मौलाना सैयद माबूद खामोश रहे। उनकी तरफ से महामंत्री सुल्तान बयान देते रहे। सुल्तान का दावा था कि मौलाना चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
कांग्रेस के वोट बैंक में लगेगा पलीता
देवबंद के पूर्व शिक्षक और मरकज-ए-औलिया के अध्यक्ष मौलाना सैयद माबूद के टिहरी लोकसभा क्षेत्र से और मासूम शाह के हरिद्वार संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की अचानक घोषणा कांग्रेस के वोट बैंक में पलीता लगा सकती है।
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अगर दोनों महानुभाव चुनाव लड़ने पर अड़े रहे तो इसका फायदा भाजपा को हो सकता है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि पुलिस प्रशासन से टोकाटोकी तो बहाना भर है, असली मकसद तो कांग्रेस को सबक सिखाना है।
माना जा रहा है कि यह सब चुनावी रणनीति के तहत किया जा रहा है। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के मुसलिम वोट बैंक पर भाजपा की निगाह पहले से है। इस क्षेत्र के मुसलिम बहुल मोहल्लों में भाजपाइयों ने चुनावी मकड़जाल फैला रखा है।
कटेंगे मुसलिम वोट
कांग्रेस से नाराज होकर अगर वाकई में मौलाना सैयद माबूद और मासूम शाह चुनाव लड़ते हैं तो इससे कांग्रेस को नुकसान होना लाजिमी है।
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हालांकि यह लोग चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हैं लेकिन कांग्रेस का वोट काट कर भाजपा प्रत्याशी को फायदा पहुंचा सकते हैं। शहर की तकरीबन 60 हजार मुसलिम आबादी में 95 फीसदी लोग देवबंद विचारधारा को मानने वाले हैं।
अगर देवबंद से संबंधित कोई भी व्यक्ति चुनाव मैदान में उतरा तो इन वोटरों की हमदर्दी उससे जुड़ जाएगी। अभी यह वोट बैंक कांग्रेस का समर्थक माना जाता रहा है।
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जाहिर है कि इनके चुनाव लड़ने पर जो भी वोट इनके पक्ष में जाएगा वह कांग्रेस से माइनस होगा। भाजपा के लिए यह स्थिति प्लस होगी। मुसलिम वोट बैंक का जो हिस्सा भाजपा अपने पक्ष में कर पाएगी वह उसकी अपनी बढ़त रहेगी।
हरिद्वार सीट पर पड़ेगा अच्छा-खासा फर्क
चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि इससे कांग्रेस को टिहरी लोकसभा में ज्यादा नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन हरिद्वार लोकसभा पर अच्छा-खासा फर्क पड़ सकता है।
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धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के अलावा हरिद्वार के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों पर भी असर पड़ सकता है। कांग्रेस के अलावा सपा, बसपा के चुनाव पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मुसलिम वोटर इन तीनों दलों में बंटता है। इस गेम में रणनीतिकारों को भाजपा फायदे में दिख रही है।