अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल स्थिति सामान्य होने तक यह फैसला लिया है कि न्यूरो संबंधी रोग के ऐसे गंभीर मरीजों जिनकी तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है, उनकी सर्जरी कर नाक-कान-गला (ईएनटी) रोगियों के वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा।
न्यूरो से संबंधित बीमारियों के ऐसे मरीज जो कम गंभीर हैं और उन्हें सर्जरी की आवश्यकता है, तो उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि डेंगू और वायरल बुखार के बढ़ते मरीजों के चलते अस्पताल के सारे वार्ड फुल हैं। डेंगू की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल न्यूरो सर्जरी वार्ड में भी डेंगू पीड़ित मरीजों को रखा जा रहा है। इमरजेंसी केस वाले मरीजों को ईएनटी के वार्ड में रखा जा रहा है।
रोजाना पांच मरीजों की होती है न्यूरो सर्जरी
दून अस्पताल में रोजाना औसतन पांच मरीजों की न्यूरो संबंधी ऑपरेशन होते हैं। कई बार तो एक दिन में 10 मरीजों तक के छोटे-बड़े न्यूरो संबंधी ऑपरेशन किए जाते हैं। दून अस्पताल में तैनात डॉ. डीपी तिवारी प्रदेश के सरकारी अस्पताल के एकमात्र न्यूरो सर्जन होने के कारण यहां इससे संबंधित आम मरीजों की ज्यादा भीड़ रहती है।