देशभर में दहशत का पर्याय बना डेंगू का मच्छर बेहद खतरनाक होता है। यह न तो मॉस्किटो कॉइल से मरता है और न ही इसका वंश फॉगिंग से खत्म होता है।
पांच साल तक एक जगह पड़ा डेंगू मच्छर का अंडा मच्छर में तब्दील हो सकता है। यह जानकारियां सामने आई हैं डीएवी कॉलेज के जूलॉजी विभाग के शोध (जून 2012 से जून 2015 तक) में। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के प्रोजेक्ट के तहत की गई शोध में डेंगू के दो प्रकार के मच्छर सामने आए हैं।
एक जो घरेलू प्रवृत्ति का होता है और दूसरा जो घर के बाहर के हिस्से में पानी में पैदा होता है। डीएवी कॉलेज के जूलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरके जौहरी, डीबीएस कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. एन पामोला देवी और शोधार्थी ऋत्विक मोंडल की ओर से डेंगू पर शोध किया गया।
शोध में यह बात सामने आई कि डेंगू को मॉस्किटो कॉइल या फॉगिंग से खत्म नहीं किया जा सकता है। इसके लिए दूसरे उपाय की जरूरत है। मसलन, डेंगू के लार्वा को पानी में पाया जाने वाला घोंघा खत्म कर सकता है। वह पानी में छोड़ने के बाद डेंगू के लार्वा की गति धीमी कर देता है जोकि बाद में पूरी तरह से खत्म कर देता है।
20 दिन तक जीवित रहता है डेंगू मच्छर
रिसर्च में डेंगू से जुड़े दो मच्छरों (एडिस इजिप्टाई व एडिस एल्बोपिक्टस) की पहचान हुई है। इनमें से इजिप्टाई तो घर के भीतर रखे पानी में पैदा होता है और आसपास के 70 मीटर दायरे में हमला कर सकता है। जबकि एल्बोपिक्टस मच्छर बाहर रखे साफ पानी में पैदा होता है और 110 मीटर तक हमला करता है।
यह झाड़ियों के आसपास जमा साफ पानी में भी पनप जाता है। शोध में दिल्ली के नेशनल सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) और मदुरै के सेंटर फोर रिसर्च इन मेडिकल एंटोमोलॉजी की सहायता ली गई।
सबसे पहले डेंगू मच्छर का अंडा होता है। यह अंडा एक निश्चित अवधि के बाद लार्वा में बदलता है। लार्वा निश्चित तापमान से प्यूपा में तब्दील होता है। प्यूपा से डेंगू का मच्छर बनता है। शोध में यह बात भी सामने आई कि पैदा होने के 15 से 20 दिन तक यह मच्छर जीवित रहता है।
पांच साल तक जिंदा रह सकता है अंडा
शोधकर्ता डॉ. आरके जौहरी ने बताया कि डेंगू के मच्छर का अंडा पांच साल तक जीवित रह सकता है। अगर अंडा, लार्वा में नहीं बदला है और तापमान घट गया है तो वह ऐसे ही पड़ा रहेगा। पांच साल तक भी वह ऐसे ही रहेगा। जैसे ही तापमान उसके अनुकूल होगा वह लार्वा और प्यूपा में बदलकर मच्छर बन जाएगा।
कैसे जड़ से खत्म करें डेंगू को
सवाल यह है कि डेंगू के पांच साल तक जीवित रहने वाले वंश को कैसे खत्म किया जाए। शोध में इस बात पर भी फोकस किया गया। डॉ. जौहरी ने बताया कि नीम से डेंगू को खत्म किया जा सकता है। नीम के पानी की दो बूंद घर के कूलर में डालकर कूलर चला दें।
मच्छर वहां से साफ हो जाएगा। लार्वा भी पानी में नहीं पनपेगा। इसी प्रकार मिट्टी का तेल भी फायदेमंद है। घर के आसपास जमा पानी में मिट्टी का थोड़ा तेल डाल दें। न अंडे बचेंगे और न ही डेंगू मच्छर।
यह बातें भी आईं सामने
- डेंगू का मच्छर शरीर के निचले हिस्सों पर विशेषकर काटता है। कपड़े पूरे पहने होने के बावजूद अगर नायलॉन के मोजे पहने हैं तो उनमें से डेंगू का मच्छर काट सकता है।
- यह मच्छर ज्यादा ऊंचाई पर नहीं उड़ पाता है।
- मच्छर हरी मिर्च के पेड़ के आसपास खूब पनपता है, लेकिन यदि वहां गेंदा का पेड़ रख दिया जाए तो इससे यह डरकर दूर भागता है।
- डेंगू मच्छर को मारने के लिए विदेशी गंबूशिया मछली भी कारगर साबित होती है। यह मछली डेंगू मच्छर का लार्वा खाती है।