सावधान! मौसम के बदलते मिजाज के बीच पछवादून में भी डेंगू ने दस्तक दे दी है। एलाइजा जांच में क्षेत्र के एक मरीज में डेंगू रिएक्टिव की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग ने डेंगू की रोकथाम के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग ने नगर पालिका विकासनगर और हरबर्टपुर के साथ ही ब्लॉक प्रमुख और तहसील प्रशासन को क्षेत्र में फॉगिंग कराने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही शिक्षा विभाग को भी पत्र लिखकर प्रार्थना के समय छात्रों को डेंगू के लक्षण और निवारण बताने के लिए कहा गया है। सीएचसी विकासनगर के प्रभारी डॉ. केके शर्मा ने बताया कि तेलपुर निवासी एक युवक की एलाइजा रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई है। पछवादून क्षेत्र में इस सीजन में यह डेंगू का पहला मामला है।
सीएचसी प्रभारी ने बताया कि डेंगू पर पूर्ण रूप से रोकथाम के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। जागरुकता से ही इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। बताया कि जल्द ही एक टीम तेलपुर गांव में जाकर डेंगू के कारणों का पता लगाएगी। लोगों को डेंगू मच्छर और उसके लार्वा को नष्ट करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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अस्पताल में बनाई डेंगू यूनिट
सीएचसी प्रभारी डॉ. केके शर्मा ने बताया कि डेंगू का पॉजिटिव केस सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में डेंगू यूनिट की स्थापना कर दी गई है। फिलहाल इस यूनिट में दो बेडों की व्यवस्था की गई है।
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जुलाई से अक्टूबर तक ज्यादा फैलता है डेंगू
डॉ. शर्मा ने बताया कि डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर तक सबसे ज्यादा फैलता है। क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।
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ये हैं लक्षण
- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना।
- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना।
- आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है।
- बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना।
- गले में हल्का दर्द होना।
- शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना।
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यह बरतें सावधानी
- बरसात में कूलर में पानी नहीं भरें।
- पानी स्टोर किया है तो उसे ढक कर रखें।
- गमलों में पानी जमा नहीं होने दें।
- डेंगू का मच्छर दोपहर में डंक मारता है और ज्यादा ऊंचाई तक उड़ नहीं पाता। ऐसे में जहां तक संभव हो फुल कमीज और पैंट ही पहने।