चकराता तहसील क्षेत्र के सीमांत गांव लाखामंडल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। सोमवार रात एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका था जिसके चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से घर पर ही प्रसव कराना पड़ा। घटना के बाद ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द पीएचसी स्थापित करने की मांग उठाई है।
लाखामंडल क्षेत्र के ग्रामीण उपचार के लिए मुख्य रूप से पड़ोसी जनपद उत्तरकाशी के नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं जो यहां से करीब 16 किलोमीटर दूर है, जबकि चकराता सीएचसी की दूरी लगभग 66 किलोमीटर है। रात के समय प्रसव, बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने या गंभीर मरीजों की हालत खराब होने पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। करीब 24 गांवों और लगभग 10 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में सरकारी अस्पताल नहीं है, जबकि स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर केवल एक एएनएम सेंटर संचालित हो रहा है। संवाद
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जनप्रतिनिधियों ने सरकार से उठाई अस्पताल स्थापना की मांग
ग्राम प्रधान बीना भट्ट ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते वह पहले भी स्वास्थ्य मंत्री को लाखामंडल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए पत्र भेज चुकी हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पंचायत की आगामी बैठक में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता बचना शर्मा ने कहा कि लाखामंडल देहरादून जिले का सीमांत गांव होने के साथ ही 24 गांवों का केंद्र बिंदु है और यहां प्राचीन शिव मंदिर होने से वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों की सुविधा को देखते हुए सरकार को यहां शीघ्र सरकारी अस्पताल की स्थापना करनी चाहिए।