जोहड़ी गांव जाने वाली सड़क में एक नाला पड़ता है। नाले के दोनों ओर साल का घना जंगल है। लेकिन नगर नियोजन विभाग ने जोनल प्लान में इसे आवासीय क्षेत्र दर्शाया है। नियमानुसार वन भूमि (फॉरेस्ट लैंड यूज) पर निर्माण नहीं किया जा सकता। जमोलीवाला गांव के पुराने खसरा नंबर को जोनल प्लान में अभिमन्यु क्रिकेट एकेडमी में दर्शाया गया है। नगर नियोजन विभाग ने पूरे गांव को एकेडमी का हिस्सा दर्शाया है। जबकि इस पूरे इलाके में सैकड़ों मकान बने हुए हैं।
ऊपर दिए गए मामलों की तरह ही दून शहर के बड़े हिस्से में लोगों को वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना का लाभ लेने में परेशानी झेलनी पड़ सकती है। प्लान में लैंड यूज संबंधी सैकड़ों गलतियां हैं। ओटीएस के तहत कंपाउंडिंग के दौरान जोनल प्लान से ही जमीन का लैंड यूज चेक किया जाता है। ऐसे में कई मामलों में कंपाउंडिंग करा पाना मुश्किल हो सकता है।
सरकार ने कुछ दिन पहले ही दूसरी बार ओटीएस लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत लोगों को अपना अवैध निर्माण कंपाउंड कराने का मौका मिलेगा। इसमें लोगों को कई मानकों में छूट भी दी जाएगी। सड़क की निर्धारित चौड़ाई, फ्रंट, रियर व साइड सेट बैक और एफएआर के मानकों में छूट के साथ लोग नक्शा पास करवा सकते हैं। लेकिन इसके लिए भूमि का लैंड यूज आवासीय या व्यावसायिक ही होना चाहिए। ओटीएस में लैंड यूज के मामले में कोई छूट नहीं मिलती है।
राजधानी दून में जमीनों के लैंड यूज की जानकारी जोनल प्लान के माध्यम से मिलती है। लेकिन, एमडीडीए नगर नियोजन विभाग ने जो जोनल प्लान तैयार किया है, उसमें गलतियों की भरमार है। जोनल प्लान लागू होने के बाद इसमें डेढ़ सौ से अधिक खामियों को लेकर लोगों ने आपत्तियां भी दर्ज कराई। लेकिन उसके बावजूद ज्यादातर त्रुटियों में सुधार नहीं हो पाया। आज भी ज्यादातर जमीनों के लैंड यूज गलत दर्ज हैं।
जोनल प्लान में गलतियों की भरमार
जोनल प्लान में बड़े पैमाने पर लैंड यूज की गलतियों के साथ ही अन्य त्रुटियां भी हैं। प्लान से शहर के कई महत्वपूर्ण इलाके पूरी तरह गायब हैं। शुरूआत में जब प्लान हुआ तो इसमें जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस मुख्यालय समेत तमाम बड़े संस्थान भी नहीं थे। इसके अलावा भी कई क्षेत्रों-कॉलोनियों को नहीं दर्शाया गया है। वहीं, कुछ स्थानों पर खसरा नंबर एक-दूसरे के ऊपर लिखे गए हैं, जिन्हें पढ़ पाना आसान नहीं है।
वन टाइम सेटलमेंट स्कीम में लैंड यूज के मानकों में छूट नहीं दी जा सकती। लैंड यूज में किसी तरह की दिक्कत न रहे इसके प्रयास किए जाएंगे। अधिक से अधिक लोग योजना का लाभ लेकर अपने निर्माण को कंपाउंड करा सकें, इसके प्रयास होंगे।
-रणवीर चौहान, वीसी, एमडीडीए