जीपीएस भी नहीं है कैब में
जो कैब लूटी गई उसमें जीपीएस भी नहीं लगा है। ऐसे में यह बात भी पुलिस के लिए उलझन भरी है। जबकि, ऊबर जैसी कंपनियां जो कैब संचालित करती हैं वह एप आधारित सेवाएं होती हैं। ऐसे में सभी गाड़ियों में जीपीएस भी लगा होता है। ऐसे में माना यह भी जा रहा है कि कैब बुक कर लाए यात्री को इस बात का पता होगा कि इसमें जीपीएस नहीं है। यही कारण रहा है कि उसने इस दुस्साहसी घटना को अंजाम दिया।
ऊबर के अलावा दो और कंपनी में रजिस्टर्ड है कैब
चालक यह कैब किसी शिव कुमार गुप्ता की कार किराये पर लेकर चलाता है। शिव कुमार गुप्ता से भी पुलिस ने बात की है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी यह कार ऊबर के अलावा ओला और रैपिडो में भी रजिस्टर्ड है। एसपी देहात ने बताया कि मालिक के अनुसार चालक उन्हें कभी कभार पांच-छह हजार रुपये दे देता है। इसके अलावा उनका चालक से ज्यादा संपर्क नहीं रहता है।