फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun: उद्योगपति विंडलास के खिलाफ एक ही महीने में दर्ज हुए थे एक के बाद एक तीन मुकदमे

Wed, 18 Jan 2023 11:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सभी मुदकमों की जांच के लिए कई बार विवेचना अधिकारी भी बदले गए। लेकिन, बाद में इन्हें सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया।
विज्ञापन
मुकदमा दर्ज (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुधीर विंडलास के खिलाफ मुदकमों की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। इसके बाद जनवरी 2022 में तीन मुकदमे एक के बाद एक दर्ज किए गए। सभी मुदकमों की जांच के लिए कई बार विवेचना अधिकारी भी बदले गए। लेकिन, बाद में इन्हें सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया।

विज्ञापन


Dehradun: उद्योगपति विंडलास के घर समेत 20 जगहों पर CBI के छापे, धोखाधड़ी के मामले में चार मुकदमे दर्ज

दुर्गेश गौतम निवासी राजपुर ने वर्ष 2018 में एसआईटी (भूमि) से शिकायत की थी। आरोप था कि सुधीर विंडलास और उनके साथियों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर अपनी जमीन बढ़ा ली है। यह करीब एक हेक्टेयर जमीन है।
विज्ञापन


इसमें कुछ तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत का भी आरोप था। एसआईटी की सिफारिश पर 14 फरवरी 2018 को राजपुर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में सुधीर विंडलास और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

विज्ञापन

अन्य तीन मुकदमे जनवरी 2022 में दर्ज हुए थे। दून पैरामेडिकल कॉलेज के मालिक संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि सुधीर विंडलास ने अपने स्टाफ के लोगों के साथ मिलकर उनकी बेशकीमती जमीन को फर्जी दस्तावेज बनाकर बेच दिया। न्यायालय में भी झूठे प्रमाण पत्र लगाकर जमीन बिक्री के करार को एकतरफा खत्म करा दिया था।

यह मुकदमा नौ जनवरी 2022 को दर्ज हुआ। उनके खिलाफ तीसरा मुकदमा 13 जनवरी को सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल सोबन सिंह दानू की शिकायत पर दर्ज हुआ। राजपुर थाने में ही दर्ज इस मुकदमे में आरोप है कि विंडलास ने सरकार से आवंटित उनकी भूमि कब्जाई थी।

इसके बाद संजय सिंह की ही शिकायत पर 25 जनवरी को चौथा मुकदमा दर्ज हुआ। इस मुकदमे में उनके भाई को भी आरोपी बनाया गया। आरोप है कि उन्होंने रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन के असली बैनामे को ही गायब करा दिया और पुराने मालिक के वारिसों से जमीन अपने नाम करा ली।

पिछले साल दर्ज हुए मुकदमों की विवेचना राजपुर से हटाकर वसंत विहार थाने को दी गई थी। लेकिन, इसमें कोई कार्रवाई न होते देख पीड़ितों ने पुलिस मुख्यालय से गुहार लगाई। जिसके बाद सीबीआई जांच की संस्तुति की गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें